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वैश्विक संकेतों के उलट उछल गए देसी शेयर बाजार, सेंसेक्स 1,774 अंक चढ़ा

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यह दोनों इंडेक्स के लिए लगातार छठी साप्ताहिक गिरावट थी और यह अक्टूबर 2025 के बाद से उनमें गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला है

Last Updated- April 02, 2026 | 10:51 PM IST
stock market

घरेलू बाजारों ने कमजोर वैश्विक संकेतों और तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी को नज़रअंदाज करते हुए इस छोटे कारोबारी हफ्ते का अंत मामूली बढ़त के साथ किया। दिन के कारोबार में 71,546 के निचले स्तर तक गिरने के बाद बेंचमार्क सेंसेक्स ने 2.5 फीसदी यानी 1,774 अंकों की ज़ोरदार रिकवरी की और 73,320 पर बंद हुआ। इस रिकवरी के बावजूद इंडेक्स ने हफ्ते की समाप्ति 0.4 फीसदी की गिरावट के साथ की। निफ़्टी 50 सत्र के दौरान 22,183 के निचले स्तर तक पहुंच गया था। लेकिन अंत में 22,713 पर बंद हुआ। यह पिछले बंद स्तर से 0.2 फीसदी ऊपर है। लेकिन पूरे हफ्ते के हिसाब से इसमें 0.5 फीसदी की गिरावट आई गई। यह दोनों इंडेक्स के लिए लगातार छठी साप्ताहिक गिरावट थी और यह अक्टूबर 2025 के बाद से उनमें गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला है।

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी और यूरोपीय तथा एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली के बावजूद बाजार हरे निशान में बंद हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद निवेशकों की धारणा जोखिम से बचने की हो गई कि वॉशिंगटन अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर भीषण हमले करेगा। इस बयान ने निकट भविष्य में तनाव कम होने की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया, जिन्होंने एक दिन पहले वैश्विक बाजारों को सहारा दिया था। बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।

बाजार के जानकारों ने घरेलू बाज़ार में तेजी की वजह निचले स्तरों पर ‘वैल्यू बाइंग’ और ‘शॉर्ट कवरिंग’ को बताया। आईटी सेक्टर के बड़े शेयरों में बढ़त और मज़बूत होते रुपये से भी बाजार को सहारा मिला। वहीं, घरेलू मोर्चे पर आर्थिक संकेत मिले-जुले रहे जहां विनिर्माण वृद्धि धीमी होकर लगभग चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गई। इसके अलावा, सरकार के जेट फ्यूल और कमर्शियल एलपीजी की कीमतें बढ़ाने से भी महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता और बढ़ गईं।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज़ के एमडी और सीईओ (वेल्थ मैनेजमेंट) अजय मेनन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की नई टिप्पणियों के बाद बाजार में घबराहट हो गई और संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीदें कमजोर पड़ गईं। उन्होंने कहा, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से निकट भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इस कारण बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड शेयर बाजार के लिए नकारात्मक हैं।

व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 0.3 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार की स्थिति मिली-जुली रही। सेक्टोरल इंडेक्स में आईटी, रियल्टी, मेटल्स और एफएमसीजी शेयरों में बढ़त देखने को मिली। ऑटो और फार्मा शेयरों में गिरावट आई।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने गुरुवार को घरेलू इक्विटी से करीब 10,000 करोड़ रुपये निकाल लिए। मार्च में एफपीआई ने 1.12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे जो किसी कैलेंडर महीने में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। हालांकि देसी म्युचुअल फंडों ने लगभग 90,000 करोड़ रुपये का निवेश किया और यह अक्टूबर 2024 के बाद सबसे अधिक है।

निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.6 फीसदी बढ़ा। यह सभी सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे ज्यादा था। इसकी वजह एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और टीसीएस में हुई बढ़त थी और इन्होंने सेंसेक्स की बढ़त में सबसे ज्यादा योगदान दिया।

ब्रोकरेज फर्म एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने कहा कि आईटी इंडेक्स के हालिया कमजोर प्रदर्शन ने इसके मूल्यांकन को आकर्षक बना दिया है। ब्रोकरेज ने कहा, निफ्टी आईटी इंडेक्स पिछले तीन महीनों में 24 फीसदी गिरा है। इसकी वजह एआई से होने वाले बदलावों और मांग में रिकवरी में हो रही देरी को लेकर जताई जा रही चिंता हैं। यह अब एक साल आगे की कमाई के 17.8 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके 10 साल के औसत से करीब 16 फीसदी से कम है।

इस बीच, निफ्टी फार्मा इंडेक्स में करीब 1 फीसदी की गिरावट आई। इसकी वजह वे रिपोर्ट थीं जिनके अनुसार, अमेरिकी प्रशासन उन दवा निर्माताओं पर टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिन्होंने घरेलू कीमतें कम करने पर सहमति नहीं जताई है। गुड फ्राइडे के अवसर पर शुक्रवार को बाजार बंद रहेंगे।

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First Published - April 2, 2026 | 10:49 PM IST

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