दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर जबरदस्त निवेश हो रहा है। हालांकि भारत के शेयर बाजार में ऐसी बड़ी AI कंपनियां नहीं हैं, जो अमेरिका, ताइवान या दक्षिण कोरिया की तरह सीधे इस ट्रेंड का फायदा उठा सकें। लेकिन AI के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने वाली भारतीय कंपनियां इस दौर की बड़ी विजेता बनकर उभरी हैं।
इस साल सबसे ज्यादा चर्चा स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज की रही है। ऑप्टिकल फाइबर बनाने वाली इस कंपनी का शेयर 530 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है। हाल ही में कंपनी को अमेरिका की एक बड़ी टेक कंपनी से 1.1 अरब डॉलर का बहुवर्षीय ऑर्डर मिला है। इसी तरह एचएफसीएल का शेयर 191 फीसदी और डेटा सेंटर के लिए कूलिंग और पावर सिस्टम से जुड़े उपकरण बनाने वाली एमटीएआर टेक्नोलॉजीज का शेयर तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुका है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, डेटा सेंटर इकोसिस्टम से जुड़ी 28 भारतीय कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य इस साल करीब 47 अरब डॉलर बढ़ा है। इन कंपनियों में ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, वायर, केबल और कूलिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। इसके उलट, व्यापक बाजार को दर्शाने वाले एनएसई निफ्टी 500 इंडेक्स का बाजार मूल्य 2026 में 300 अरब डॉलर से ज्यादा घटा है।
AI से जुड़ी हर गतिविधि बड़े डेटा सेंटरों पर निर्भर करती है। इन डेटा सेंटरों को भारी मात्रा में बिजली और कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है। इसी वजह से पारंपरिक औद्योगिक कंपनियां अब निवेशकों की पसंद बन गई हैं। बाजार में इसे “AI Capex Trade” कहा जा रहा है।
एक्सिस म्यूचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी आर. शिवकुमार का कहना है कि भारत भले ही AI सॉफ्टवेयर की दौड़ में पीछे हो, लेकिन AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले निवेश का फायदा भारतीय कंपनियों को मिल सकता है। उनका मानना है कि डेटा सेंटर और उससे जुड़ी पूरी सप्लाई चेन में अवसर मौजूद हैं।
अमेजन ने 2030 तक भारत में क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर 12.7 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बनाई है। वहीं गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट विशाखापट्टनम में करीब 15 अरब डॉलर के AI इंफ्रास्ट्रक्चर हब पर काम कर रही है। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के एक संयुक्त उपक्रम ने पिछले साल 11 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट का समझौता किया था। अडानीकॉननेक्स ने भी गूगल और उबर जैसी कंपनियों के साथ डेटा सेंटर निर्माण के लिए साझेदारी की है।
ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का कहना है कि डेटा सेंटर बनाने, उन्हें बिजली देने और ठंडा रखने वाले उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है। कई उत्पादों की सप्लाई में दो से चार साल तक का इंतजार है, जिससे कंपनियों के पास बड़े ऑर्डर जमा हो रहे हैं। इसी वजह से विदेशी निवेशक भी इन कंपनियों में निवेश बढ़ा रहे हैं। मार्च 2026 तक औद्योगिक कंपनियों में विदेशी फंडों की हिस्सेदारी बढ़कर 14 फीसदी हो गई, जो पिछले दो साल का सबसे ऊंचा स्तर है।
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भारत में AI आधारित बड़ी टेक कंपनियों की कमी है, लेकिन हिटाची एनर्जी इंडिया, एबीबी इंडिया, कमिंस इंडिया, फिनोलेक्स केबल्स और स्टरलाइट जैसी कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग से फायदा उठा रही हैं।
एंजेल वन के मुताबिक, निवेशकों को अब सिर्फ AI थीम नहीं बल्कि ऐसी कंपनियां पसंद आ रही हैं जिनकी कमाई सीधे AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से जुड़ी है। हालांकि ब्रोकरेज ने चेतावनी भी दी है कि कई शेयरों में तेज उछाल के बाद वैल्यूएशन काफी महंगे हो गए हैं और किसी भी तरह की निराशा निवेशकों को नुकसान पहुंचा सकती है।
नोमुरा के विश्लेषकों का मानना है कि डेटा सेंटर पर होने वाला निवेश इस समय दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक निवेश चक्र बन चुका है। उनका कहना है कि इसका आकार 4G नेटवर्क विस्तार, 2008 के बाद LNG इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और अमेरिका के शेल ऑयल बूम से भी बड़ा हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI क्रांति का फायदा सिर्फ सॉफ्टवेयर कंपनियों को नहीं मिलेगा, बल्कि उन कंपनियों को भी मिलेगा जो डेटा सेंटर बनाने और चलाने के लिए जरूरी उपकरण और सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। भारत में फिलहाल यही कंपनियां AI बूम की सबसे बड़ी लाभार्थी बनकर उभरी हैं। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)