अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण पहले दो सप्ताह में हुए तेज उतार-चढ़ाव से सक्रिय इक्विटी म्युचुअल फंड (एमएफ) योजनाओं की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) को लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा। फरवरी के अंत में एयूएम का जो आंकड़ा 35.4 लाख करोड़ रुपये पर था, वह 13 मार्च तक 6.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ घटकर 33 लाख करोड़ रुपये रह गया।
हालांकि, इक्विटी बाजारों में आई गिरावट की तुलना में एयूएम में आई कमी कम गंभीर थी, जिससे संकेत मिलता है कि इस दौरान इक्विटी योजनाओं ने लगातार शुद्ध निवेश हासिल किया।
लार्जकैप फंडों ने दो सप्ताह की अवधि में निफ्टी 100 में 7.9 प्रतिशत की गिरावट की तुलना में अपनी एयूएम में 7.3 प्रतिशत की गिरावट देखी। फ्लेक्सी-कैप फंडों ने निफ्टी 500 में 7.7 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले एयूएम में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। स्मॉलकैप फंडों के मामले में एयूएम में 5.5 प्रतिशत की कमी आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 250 सूचकांक 6.4 प्रतिशत गिरा।
हालांकि पोर्टफोलियो संरचना में अंतर के कारण ये तुलनाएं पूरी तरह समान नहीं हैं, फिर भी वे निवेश के रुझान की दिशा के बारे में बताती हैं। दो बड़े फंड हाउसों के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इक्विटी योजनाओं में एकमुश्त निवेश लगभग एक साल से सुस्त बना हुआ था, लेकिन इस महीने इसकी रफ्तार तेज हुई है। एक अधिकारी ने कहा, ‘हम एकमुश्त निवेश में वृद्धि देख रहे हैं, जिसका कारण नकदी निवेश है क्योंकि निवेशक इक्विटी निवेश बढ़ाने के लिए बाजार की गिरावट का लाभ उठा रहे हैं।’
रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंटों की ओर से मुहैया अनुमानों की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि दो-सप्ताह की अवधि में सक्रिय इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश लगभग 11,000 करोड़ रुपये था। इस रफ्तार से पूरे महीने के लिए शुद्ध निवेश फरवरी की तुलना में कम रह सकता है। संपत्ति प्रबंधक और सलाहकार कहते हैं कि वे उन निवेशकों को धीरे-धीरे अपना निवेश बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं, जिनका इक्विटी आवंटन कम है क्योंकि मूल्यांकन में गिरावट आई है।
इक्विरस वेल्थ के एमडी (बिजनेस हेड) अंकुर पुंज ने कहा, ‘हम जो बदलाव देख रहे हैं वह मूल्यांकन में से जुड़ा हुआ है, विशेष रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में जो तेजी से बढ़े थे।