भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) के खिलाफ 11 मार्च 2024 को एक ईमेल के जरिए शिकायत मिली। यह शिकायत किसी व्हिसलब्लोअर, पूर्व कर्मचारी या एक्टिविस्ट निवेशक ने नहीं, बल्कि कंपनी के एक शेयरधारक ने की थी। शिकायत में कंपनी की बैलेंस शीट में वर्षों से बकाया पड़े बड़े ट्रेड रिसीवेबल्स यानी ग्राहकों से मिलने वाली रकम को लेकर सवाल उठाए गए थे।
करीब दो साल बाद यह मामला सेबी के एक कड़े अंतरिम आदेश तक पहुंच गया है। सेबी ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने अपने राजस्व (revenue) के आंकड़ों को गलत तरीके से पेश किया हो सकता है। इसके अलावा कंपनी पर महत्वपूर्ण सहायक कंपनियों (सब्सिडियरी) से जुड़ी जानकारी का पूरा खुलासा नहीं करने, प्रमोटर से जुड़े संस्थानों के जरिए फंड ट्रांसफर करने और विदेशों में अपने कारोबार की जांच व सत्यापन में बाधा डालने के भी आरोप लगाए गए हैं।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स से ग्राहकों के हिसाब से बिक्री का ब्योरा, सप्लायर्स से की गई खरीदारी का रिकॉर्ड, देनदारों और लेनदारों की जानकारी, सहायक कंपनियों के वित्तीय दस्तावेज, लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे। इसके अलावा कंपनी के अकाउंटिंग सिस्टम और खातों तक पहुंच भी मांगी गई।
हालांकि, सेबी के अनुसार कंपनी ने कई सवालों के जवाब नहीं दिए या फिर अधूरी जानकारी उपलब्ध कराई। जांच के लिए नियुक्त फॉरेंसिक ऑडिटर ने भी कहा कि उसे कंपनी के एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) सिस्टम, खातों की पुस्तकों और जर्नल डेटा तक पहुंच नहीं दी गई।
ऑडिटर ने यह भी बताया कि जिन लेनदेन की जांच की जा रही थी, उनमें से बड़ी संख्या की पुष्टि नहीं हो सकी क्योंकि उनसे जुड़े दस्तावेज या तो अधूरे थे या उपलब्ध ही नहीं कराए गए।
सेबी के अंतरिम आदेश के मुताबिक, 7,000 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन के नमूनों की जांच की गई, लेकिन इनमें से केवल एक छोटे हिस्से के लिए ही पूरे दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
इसी के बाद जांच का दायरा सिर्फ बकाया रकम (रिसीवेबल्स) तक सीमित नहीं रहा। सेबी ने यह भी जांच शुरू कर दी कि कंपनी द्वारा पेश किए गए वित्तीय आंकड़ों और कारोबारी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सकती है या नहीं।