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सरकारी बैंकों ने रचा इतिहास! पहली बार 1.98 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मुनाफा

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सरकारी बैंकों ने FY26 में रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। SBI, PNB और Bank of Baroda ने शानदार प्रदर्शन किया

Last Updated- May 13, 2026 | 9:13 AM IST
PSB

देश के 12 सरकारी बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। वित्त मंत्रालय ने बयान में बताया कि सरकारी बैंक लगातार चौथे साल लाभप्रदता में रहे। सरकारी बैंकों की लाभप्रदता सालाना आधार 11.12 प्रतिशत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गई। हालांकि वित्त वर्ष 2024-25 में इनकी लाभप्रदता 1.78 लाख करोड़ रुपये थी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 24 में 1.41 लाख करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 23 में 1.04 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022 में 66,543 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था।

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने वित्त वर्ष 26 में अभी तक का सर्वाधिक शुद्ध सालाना लाभ 80,032 करोड़ रुपये दर्ज किया और इस वित्त वर्ष में बैंक के लाभ में सालाना आधार पर 12.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी ऋणदाता बैंक ऑफ बड़ौदा ने लाभ वित्त वर्ष 26 में 20,021 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। तीसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नैशनल बैंक ने वित्त वर्ष 26 में 16,904 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया।

वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 26 के दौरान मजबूत वित्तीय प्रदर्शन जारी रखा और यह निरंतर व्यावसायिक वृद्धि, बेहतर संपत्ति गुणवत्ता, रिकॉर्ड लाभप्रदता और मजबूत पूंजी स्थिति को दर्शाता है।’ मंत्रालय ने बताया कि इस बेहतर प्रदर्शन ने तेजी से बढ़ते भारतीय अर्थव्यवस्था की ऋण जरूरतों का समर्थन करने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की मजबूती, स्थिरता और बढ़ी हुई संस्थागत क्षमता का प्रदर्शन किया है।

वित्त वर्ष 2026 में सरकारी बैंकों का कुल कारोबार 12.8 प्रतिशत बढ़कर 283.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें कुल जमा राशि सालाना आधार 10.6 प्रतिशत बढ़कर 156.3 लाख करोड़ रुपये और ऋण 15.7 प्रतिशत बढ़कर 127 लाख करोड़ रुपये हो गया।

मंत्रालय ने कहा, ‘वित्त वर्ष 26 के दौरान खुदरा, कृषि और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम खंडों में कारोबारी ऋण का जबरदस्त विस्तार हुआ। खुदरा ऋण में 18.1 प्रतिशत, कृषि ऋण में 15.5 प्रतिशत और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम ऋण में 18.2 प्रतिशत का विस्तार हुआ। यह वृद्धि सरकारी बैंकों की उद्यमिता का समर्थन करने, वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और व्यापक आर्थिक विकास को सक्षम करने की महत्त्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।’

हालांकि कारोबारी वृद्धि मजबूर रही, वहीं वित्त वर्ष 2026 में सरकारी ऋणदाताओं की संपत्ति की गुणवत्ता भी सुधरी है। मार्च 2026 तक सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात 1.93 प्रतिशत और गैर निष्पादित संपत्तियों का शुद्ध अनुपात 0.39 प्रतिशत तक गिर गया। यह आंकड़ा ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर के तनावग्रस्त परिसंपत्तियों को दर्शाता है। मार्च 2025 में सरकारी ऋणदाताओं का सकल गैर निष्पादित संपत्तियां 2 प्रतिशत से अधिक और शुद्ध गैर निष्पादित संपत्ति अनुपात 0.5 प्रतिशत से अधिक था।

इसके अतिरिक्त वित्त वर्ष में नई परिसंपत्तियों की चूक का गिरना जारी रहा। इससे चूक का अनुपात घटकर 0.7 प्रतिशत हो गया। बट्टे खाते में डाली गई परिसंपत्तियों की वसूली सहित कुल वसूली 86,971 करोड़ रुपये रही, जो बेहतर वसूली तंत्र और सरकारी बैंकों में बेहतर ऋण अनुशासन को दर्शाता है।

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First Published - May 13, 2026 | 9:13 AM IST

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