RBI Forex Measures: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया फैसलों से आने वाले महीनों में देश में विदेशी मुद्रा का अच्छा-खासा फ्लो देखने को मिल सकता है। इससे बैंकों को पैसा जुटाने में आसानी होगी, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और डॉलर के मुकाबले रुपये पर बना दबाव भी कुछ कम हो सकता है। माना जा रहा है कि इन कदमों का असर बैंकिंग सेक्टर के साथ-साथ पूरे वित्तीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा।
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल का अनुमान है कि RBI की नई योजनाओं की वजह से वित्त वर्ष 2027 में 40-50 अरब डॉलर तक का विदेशी मुद्रा फ्लो आ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इससे बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति बेहतर होगी, जमा जुटाने में राहत मिलेगी और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी। ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि निकट भविष्य में डॉलर के मुकाबले रुपया 93-94 के स्तर तक मजबूत हो सकता है।
RBI ने 8 जून से 30 सितंबर 2026 तक बैंकों के लिए एक विशेष सुविधा शुरू की है। इसके तहत बैंक एनआरआई ग्राहकों से FCNR(B) जमा जुटा सकते हैं और उस पैसे को रुपये में बदल सकते हैं। खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव यानी हेजिंग की लागत RBI खुद उठाएगा।
इतना ही नहीं, इन जमाओं को CRR और SLR जैसी कुछ नियामकीय शर्तों से भी छूट दी गई है। इससे बैंकों के लिए इस योजना के तहत पैसा जुटाना काफी आकर्षक हो गया है।
RBI की इस सुविधा का फायदा सीधे एनआरआई जमाकर्ताओं को भी मिल रहा है। पहले FCNR(B) जमा पर जहां करीब 3-4 फीसदी ब्याज मिलता था, अब कई बड़े बैंक इसे बढ़ाकर करीब 6 फीसदी तक ले गए हैं। कुछ छोटे बैंक तो 7 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं।
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि इससे विदेशी भारतीयों के लिए भारत में पैसा जमा करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आकर्षक हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में निवेशकों को 15-26 फीसदी तक का संभावित रिटर्न भी मिल सकता है।
रिपोर्ट में 2013 का भी जिक्र किया गया है। उस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण उभरते बाजारों से पैसा निकल रहा था और रुपये पर काफी दबाव था। तब RBI ने इसी तरह की स्वैप सुविधा शुरू की थी। इस योजना के बाद वित्त वर्ष 2014 में करीब 27 अरब डॉलर के FCNR(B) डिपॉजिट आए थे और कुल विदेशी फ्लो 34 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। उस समय विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत हुआ था और रुपये में भी सुधार देखने को मिला था।
RBI ने सिर्फ FCNR(B) जमा पर ही नहीं, बल्कि विदेश से लिए जाने वाले कर्ज यानी ECB और विदेशी मुद्रा उधारी पर भी राहत दी है। अब बैंक RBI के साथ केवल 1.5 फीसदी की रियायती लागत पर हेजिंग कर सकेंगे। आमतौर पर इस तरह की हेजिंग की लागत 3.5 से 4 फीसदी तक होती है। यानी बैंकों को करीब 200-250 बेसिस प्वाइंट का सीधा फायदा मिल सकता है। इससे विदेश से पैसा जुटाने की लागत घटेगी और बैंक सस्ते संसाधन हासिल कर सकेंगे।
पिछले कुछ समय से विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजारों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं, दूसरे एशियाई बाजारों में बेहतर अवसरों और रुपये की कमजोरी ने विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि RBI के ये कदम, डेट बाजार में कर राहत और विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा निवेश विकल्प उपलब्ध कराने जैसे फैसले मिलकर विदेशी मुद्रा का फ्लो बढ़ा सकते हैं। इससे रुपये पर दबाव कम होगा और विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती मिलेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक जिन बैंकों का ग्राहक आधार बड़ा है और जिनकी विदेशों में अच्छी मौजूदगी है, वे इस मौके का सबसे ज्यादा फायदा उठा सकते हैं। ऐसे बैंक ज्यादा FCNR(B) जमा आकर्षित कर सकते हैं और उस पैसे का इस्तेमाल अपने कारोबार को बढ़ाने में कर सकते हैं। ब्रोकरेज का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर के लिए यह कदम सकारात्मक है। हालांकि बैंकों की कमाई कितनी बढ़ेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वे जुटाए गए पैसे को कितनी तेजी और कितनी कुशलता से कर्ज के रूप में इस्तेमाल कर पाते हैं।
मोतीलाल ओसवाल ने ICICI बैंक, HDFC बैंक, SBI और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को इस थीम में अपना टॉप पिक बताया है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)