लगभग एक दशक पहले देश के शेयर बाजार में ज्यादातर सौदे अपनी पसंद की ब्रोकरेज फर्म के किसी डीलर से कराए जाते थे और इसके लिए उसे फोन करना पड़ता था। मगर अब ऐसा नहीं रहा। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2015 में इक्विटी कैश मार्केट में 60 फीसदी से ज्यादा कारोबार इसी तरीके से होता था मगर 2025-26 में यह घटकर केवल 25.1 फीसदी रह गया।
एनएसई से प्रकाशित ‘मार्केट पल्स’ के अनुसार डीलर वाली सिस्टम में साल दर साल और महीने दर महीना गिरावट आ रही है। इस सिस्टम में कंप्यूटर-टु-कंप्यूटर लिंक (सीटीसीएल) और स्क्रीन पर चलने वाला प्लेटफॉर्म ‘नेशनल एक्सचेंज फॉर ऑटोमेटेड ट्रेडिंग’ (एनईएटी) शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘डीलर वाले रास्ते का इस्तेमाल और भी कम हो गया। सीटीसीएल/एनईएटी टर्मिनलों की हिस्सेदारी महीना दर महीना 124 आधार अंक और साल दर साल 473 आधार अंक घटकर 21.4 फीसदी रह गई।’
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई नए तरीके आ रहे हैं, जिनसे पता चलता है कि ऑटोमेटेड बुनियादी सुविधाओं को तेजी से अपनाया जा रहा है। साथ ही मोबाइल से सौदे करने वाले निवेशकों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।’
सैमको सिक्योरिटीज के कार्यकारी निदेशक और प्रेसिडेंट नीलेश शर्मा का कहना है कि अब फोन करके या ब्रोकर के दफ्तर जाकर ऑर्डर देने वाले निवेशकों की हिस्सेदारी बहुत कम हो गई है और लगातार घट रही है। आज के ज्यादातर सक्रिय कारोबारी मोबाइल ऐप को प्राथमिकता देते हैं। ये ऐप उन्हें रियल-टाइम यानी तत्काल अलर्ट प्रदान करते हैं, जिनमें कीमत के लक्ष्य भी शामिल हैं। यही सूचनाएं किसी वक्त डीलर फोन पर ग्राहकों को देते थे।
शर्मा ने कहा कि ब्रोकरेज फर्मों के लिए सौदे करने वाली बड़ी टीमें रखने के बजाय मोबाइल फोन के जरिये काम करना ज्यादा किफायती भी है। कॉल-ऐंड-ट्रेड सेवाएं लेने वाले ग्राहकों से अक्सर अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है, जिससे इनका आकर्षण और भी घट रहा है। शर्मा ने कहा, ‘बहुत से ब्रोकरेज अब कॉल पर सौदे करने का शुल्क लेते हैं, जिससे ग्राहक दूर हो जाते हैं।’
एक पारंपरिक ब्रोकरेज फर्म के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक दशक पहले अधिकांश ग्राहक सौदे करने के लिए डीलरों पर भरोसा करते थे। लेकिन बीच के सालों में ब्रोकिंग उद्योग में बुनियादी बदलाव आ गए और तकनीक के कारण ग्राहक जोड़ना तथा मोबाइल ऐप के जरिये सीधे ट्रेडिंग करना बहुत आसान हो गया।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक ब्रोकरेज फर्मों ने अब तकनीक की खाई पाट दी है। सभी प्रमुख फर्म अब मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक ऑनबोर्डिंग कराती हैं मगर ग्राहकों का एक पुराना तबका अब भी ऑर्डर देने से पहले डीलर से बात करना पसंद करता है। इस तबके के पास आम तौर पर युवा और तकनीक को तरजीह देने वाले निवेशकों के मुकाबले बड़ा पोर्टफोलियो होता है। इसकी वजह से डीलरों का काम अब भी चल रहा है।
अधिकारी ने फुल सर्विस ब्रोकरों का हवाला देते हुए कहा, ‘इसके उलट डीलरों के पास कर्मचारी बढ़ गए हैं।’ उन्होंने कहा कि डीलरों के पास कर्मचारियों की संख्या ग्राहकों की संख्या के अनुपात में चाहे नहीं बढ़ी हो मगर कुल संख्या बढ़ गई है।
एनएसई के आंकड़े से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025 में 90 फीसदी से ज्यादा सालाना गिरावट के बावजूद सीटीसीएल/एनईएटी माध्यम का वित्त वर्ष 2026 के दौरान कुल कमोडिटी डेरिवेटिव कारोबार में 80.3 फीसदी से ज्यादा हिस्सा रहा।