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विदेशी ब्रोकरेज सिटी ने घटाया निफ्टी का टारगेट, 27,000 से किया 26,000

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ब्रोकरेज ने बाजार के सुस्त माहौल के लिए भू-राजनीतिक टकराव, अल-नीनो जैसे जलवायु जोखिम और दुनिया भर में एआई-आधारित निवेश थीमों के तेजी से बढ़ते चलन को जिम्मेदार ठहराया

Last Updated- June 11, 2026 | 11:54 PM IST

वै​श्विक ब्रोकरेज फर्म सिटी ने निफ्टी 50 सूचकांक के लिए अपना लक्ष्य 27,000 से घटाकर 26,000 कर दिया है। उसने इसका कारण लगातार बने हुए भू-राजनीतिक तनाव, कॉरपोरेट मुनाफे की वृद्धि में जोखिम और वै​श्विक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के तंत्र में भारत की स्थिति को लेकर चिंताएं बताई हैं।

निफ्टी 50 सूचकांक 23,162 पर बंद हुआ। इसका मतलब है कि मौजूदा स्तर से इसमें कीमत लक्ष्य के हिसाब से करीब 12 प्रतिशत तेजी की गुंजाइश है। ब्रोकरेज ने अपने मूल्यांकन ढांचे को मार्च 2028 की कमाई के आधार पर आगे बढ़ाया है। उसने अब बेंचमार्क सूचकांक की वैल्यू को भविष्य की आय का 18 गुना आंका है। भारत के बारे में मध्याव​धि में सकारात्मक नजरिया बनाए रखते हुए सिटी ने कहा कि अल्पाव​धि में आने वाली चुनौतियां विदेशी निवेशकों की धारणा और बाजार के प्रदर्शन पर असर डाल सकती हैं।

ब्रोकरेज ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘मध्याव​धि के लिए अच्छा आउटलुक और कम पोजिशन का मतलब है कि अगर पश्चिम एशिया संकट सुलझता है और विदेशी पोर्टफोलियो से पैसा बाहर जाने का सिलसिला रुकता है, तो इसमें बढ़त देखने को मिल सकती है।’

पिछले दो साल में घरेलू इक्विटी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भागीदारी तेजी से कम हुई है। सिटी के अनुसार वै​श्विक उभरते बाजार (जीईएम) फंडों में भारत का हिस्सा लगभग पांच साल के निचले स्तर पर आ गया है, जबकि विदेशी निवेशकों के बीच देश की ‘अंडरवेट’ स्थिति पिछले दो दशकों में सबसे ऊंचे स्तर के करीब है।

रिपोर्ट के अनुसार, उभरते बाजारों के पोर्टफोलियो में भारत का हिस्सा 2024 के मध्य में लगभग 20 प्रतिशत से घटकर करीब 11 प्रतिशत रह गया है। ऐसा कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक लगभग 30 अरब डॉलर की अनुमानित एफपीआई निकासी के साथ हुआ है।

ब्रोकरेज ने बाजार के सुस्त माहौल के लिए भू-राजनीतिक टकराव, अल-नीनो जैसे जलवायु जोखिम और दुनिया भर में एआई-आधारित निवेश थीमों के तेजी से बढ़ते चलन को जिम्मेदार ठहराया।

सिटी का कहना है कि एआई को सपोर्ट करने वाले बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर को बनाने में भारत की भागीदारी अभी सीमित है। इससे मध्याव​धि में घरेलू रोजगार, वेतन और खपत पर ऑटोमेशन के संभावित असर को लेकर चिंताएं हो रही हैं। हालांकि, उसका मानना ​​है कि आगे चलकर यह स्थिति भारत के पक्ष में बदल सकती है, क्योंकि वैल्यू क्रिएशन एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं से हटकर उन सॉफ्टवेयर और सेवा कंपनियों की ओर जा सकता है जिन्हें एआई अपनाने से फायदा होता है।

ब्रोकरेज ने कॉरपोरेट मुनाफे की वृद्धि में कमी की ओर भी इशारा किया। मार्च तिमाही में बीएसई-100 कंपनियों की कुल एबिटा वृद्धि सालाना आधार पर लगभग 6 प्रतिशत रही, जो सिटी के अनुमानों और पुराने रुझानों से थोड़ी कम थी।

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First Published - June 11, 2026 | 11:47 PM IST

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