India Markets Outlook: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव का असर नियर टर्म में भारतीय शेयर बाजारों पर देखने को मिल सकता है। मजबूत डॉलर और महंगे तेल के कारण रुपये पर दबाव बना रहेगा। इसके चलते शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। हालांकि भारत की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, बेहतर कमाई की संभावना और सरकार की नीतिगत सपोर्ट के चलते लंबी अवधि की ग्रोथ की मजबूत संभावना बनी हुई है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज (Emkay Global Financial Services) ने अपनी ताजा इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में यह बात कही है।
रिपोर्ट में पश्चिम एशिया संकट को बड़ी चिंता बताया गया है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट पिछले 11 सप्ताह से बंद रहने के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 105-110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी हुई हैं। एमके ने कहा कि लंबे समय तक ऊंचे तेल दाम भारत की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकते हैं क्योंकि देश ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है।
एमके की रिपोर्ट के अनुसार, अगर ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहता है, तो भारत का चालू खाता घाटा GDP के 2.4 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि पहले इसका अनुमान 1.3 प्रतिशत था। इसी स्थिति में GDP ग्रोथ 7 प्रतिशत के अनुमान से घटकर 6.3 प्रतिशत तक आ सकती है और खुदरा महंगाई 4.6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
अगर तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो GDP ग्रोथ 5.5 प्रतिशत तक गिर सकती है और महंगाई 5 प्रतिशत तक जा सकती है। इससे सरकार और आम लोगों दोनों पर दबाव बढ़ेगा।
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एमके ग्लोबल के रिसर्च हेड शेषाद्रि सेन ने कहा कि वैश्विक तनाव और महंगे तेल से बाजार में अस्थायी दबाव रह सकता है, लेकिन भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। अर्निंग्स में मजबूती, सरकार की नीतियां, घरेलू महंगाई में राहत और कैपेक्स निवेश भारतीय बाजार को मजबूत आधार दे रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हाल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के केवल 20 प्रतिशत नुकसान की भरपाई हुई है। अगर कच्चा तेल महंगा बना रहता है तो आगे और कीमतें बढ़ सकती हैं। महंगी ऊर्जा कीमतें अर्थव्यवस्था पर चार तरफ से दबाव डालती हैं। महंगाई बढ़ती है, कंपनियों की अर्निंग्स प्रभावित होती है, सरकार की वित्तीय स्थिति कमजोर होती है और उपभोक्ताओं का खर्च घटता है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सरकार की कई नीतियां अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही हैं। इनमें आयकर में कटौती, GST में राहत और फरवरी 2025 से अब तक RBI द्वारा कुल 125 बेसिस प्वाइंट की ब्याज दर कटौती शामिल है। इससे बाजार में नकदी बढ़ेगी, उपभोक्ता खर्च सुधरेगा और निजी निवेश को मदद मिलेगी। रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सरकार का लगातार पूंजीगत खर्च आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा देगा।
एमके ग्लोबल ने रिपोर्ट में मार्च 2027 तक निफ्टी के 29,000 अंक तक पहुंचने का अनुमान जताया है। ब्रोकरेज हाउस ने FY28 की अर्निंग्स के आधार पर निफ्टी के लिए 19.2x वैल्यूएशन मल्टीपल का लक्ष्य रखा है। चौथी तिमाही (Q4FY26) के नतीजों की शुरुआत अब तक स्थिर रही है। एमके की कवरेज वाली करीब 20 प्रतिशत कंपनियों ने अब तक अपने नतीजे घोषित किए हैं। इनमें से 46 प्रतिशत कंपनियों की कमाई अनुमान से बेहतर रही, जबकि केवल 29 प्रतिशत कंपनियों के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे। इससे अलग-अलग सेक्टरों में मजबूती का संकेत मिलता है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि एमके ने FY27 के लिए निफ्टी EPS का अनुमान 1,230 रुपये पर बरकरार रखा है और लगभग 13 प्रतिशत अर्निंग्स ग्रोथ की उम्मीद जताई है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियां मौजूदा चुनौतियों के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ सकती हैं। फिलहाल निफ्टी FY27 की फॉरवर्ड अर्निंग्स के मुकाबले लगभग 19.2 गुना वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले पांच वर्षों के औसत स्तर के करीब है। ब्रोकरेज का मानना है कि वैश्विक कारणों से होने वाली किसी भी बड़ी गिरावट को लंबी अवधि के निवेश के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
ब्रोकरेज ने डिस्क्रेशनरी कंजम्प्शन, मटेरियल्स, इंडस्ट्रियल्स और रियल एस्टेट सेक्टर पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है। वहीं वित्तीय सेवाएं, ऊर्जा, हेल्थकेयर, स्टेपल्स, टेलीकॉम और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर फिलहाल सतर्क रुख अपनाया गया है।
एमके का मानना है कि मजबूत डॉलर और महंगे तेल के कारण रुपये पर निकट भविष्य में दबाव बना रह सकता है। हालांकि जैसे ही भू-राजनीतिक स्थिति सामान्य होगी और होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खुलेगा, रुपये में सुधार आ सकता है और बॉन्ड यील्ड तथा निवेशकों का भरोसा भी बेहतर होगा। बाजार अभी FY27 और FY28 की संभावित अर्निंग्स रिकवरी को पूरी तरह कीमतों में शामिल नहीं कर रहा है। ब्रोकरेज को अगले दो वित्त वर्षों में भारतीय कंपनियों की अर्निंग्स में लगभग 14 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है।
ब्रोकरेज ने कहा कि अगर ईरान संघर्ष का कूटनीतिक समाधान निकलता है और कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होती है, तो बाजार का भरोसा तेजी से सुधर सकता है और खपत आधारित ग्रोथ फिर मजबूत हो सकती है।
रिपोर्ट में NBFC सेक्टर को लेकर भी सकारात्मक रुख दिखाया गया है। पिछले दो-तीन वर्षों में बेहतर एसेट क्वालिटी, मजबूत बैलेंस सीट और तेज ग्रोथ के कारण इस सेक्टर की वैल्यूएशन में बड़ा सुधार आया है। बीमा क्षेत्र को लेकर रिपोर्ट में मिला-जुला लेकिन बेहतर होता नजरिया पेश किया गया है। जीवन बीमा कंपनियों को GST से जुड़े फायदे और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स का लाभ मिला है। वहीं सामान्य बीमा क्षेत्र में क्लेम अनुपात और कीमतों को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। ऑटो सेक्टर पर रिपोर्ट में कहा गया कि FY28 तक उद्योग की कुल बिक्री 3.66 करोड़ यूनिट से बढ़कर लगभग 4.28 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है। टू-व्हीलर, SUV और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की मांग इस ग्रोथ को आगे बढ़ाएगी।