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बाजार में बढ़त के लिए पूंजीगत खर्च की बहाली, युद्धविराम अहम: निमेश चंदन

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चंदन का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिमों के बने रहने के बावजूद भारत के आर्थिक फंडामेंटल और कमाई की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं

Last Updated- May 28, 2026 | 9:59 PM IST
Nimesh Chandan
बजाज फिनसर्व एएमसी के मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) निमेश चंदन

बजाज फिनसर्व एएमसी के मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) निमेश चंदन का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिमों के बने रहने के बावजूद भारत के आर्थिक फंडामेंटल और कमाई की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। अभिषेक कुमार को दिए एक ईमेल इंटरव्यू में चंदन ने कहा कि लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिड और स्मॉलकैप शेयरों का बेहतर प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है, जिसकी मुख्य वजह कमाई में बढ़ोतरी की बेहतर संभावनाएं हैं। बातचीत के मुख्य अंश :

क्या बाजार पश्चिम एशिया के जोखिमों की पूरी झलक दे रहे हैं, खासकर अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं?

जहां तेल की हाजिर कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, वहीं ब्रेंट क्रूड वायदा संकेत दे रहा है कि वैश्विक वित्तीय बाजार इस समस्या के जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। दोनों पक्षों की मौजूदा बातचीत से भी यही लगता है कि हम तूफान में फंसने की बजाय उससे निकल रहे हैं। हालांकि कमाई से जुड़े कुछ जोखिम हैं। लेकिन इनके लंबे समय तक बने रहने की संभावना नहीं है बल्कि ये जोखिम किसी खास सेक्टर तक ही सीमित रह सकता है, न कि हर जगह फैलेगा।

अगले दौर में बाजार की रिकवरी किन अहम कारणों से आगे बढ़ेगी? 

पिछले 18 महीनों में कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के आर्थिक फंडामेंटल्स मजबूत बने हुए हैं। निजी पूंजीगत खर्च के चक्र के शुरुआती संकेत दिखाई दे रहे हैं, जबकि सरकारी पूंजीगत खर्च भी मजबूत बना हुआ है। सरकार के कई कदम जैसे जीएसटी में कटौती, आयकर में छूट और आने वाले समय में वेतन आयोग लागू होने की संभावना पहले से ही खपत को बढ़ावा दे रहे हैं।

इस रुझान के और मजबूत होने की उम्मीद है।  कमाई का हाल का सीजन अच्छा रहा है। अब तक निफ्टी 500 की लगभग 80 फीसदी कंपनियों ने अपने नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कुल राजस्व (13 फीसदी) और समायोजित मुनाफे (32 फीसदी) में दो अंकों की बढ़ोतरी हुई है। हमें उम्मीद है कि सरकारी दखल और भू-राजनीतिक तनाव कम होने से भारतीय रुपया स्थिर होगा। बेहतर होते फंडामेंटल भी देश में विदेशी पूंजी वापस लाएंगे। इन कारणों से हमें उम्मीद है कि बाजार अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों की ओर बढ़ेंगे।

अमेरिका-ईरान जंग के चलते आपने किन सेक्टरों में बदलाव किए? 

हमने सिर्फ कुछ रणनीतिक बदलाव किए हैं। हमने कमोडिटी और एनर्जी वैल्यू चेन के साथ-साथ निर्यात पर आधारित अच्छी गुणवत्ता वाले कारोबार में निवेश बढ़ाया है। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से जुड़े पूंजीगत खर्च (जिसके लिए पूरी वैल्यू चेन में कई तरह की धातुओं और खनिजों की जरूरत होती है) और युद्ध की वजह से सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारणों ऊर्जा और कमोडिटी सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

जैसे-जैसे सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां कम होंगी, दुनिया भर के देश जरूरी कमोडिटी और खनिजों का रणनीतिक भंडार बनाएंगे। युद्ध से प्रभावित इन्फ्रास्ट्रक्चर के दोबारा निर्माण से धातुओं की मांग बढ़ेगी, जिससे उनकी कीमतों को भी सहारा मिलेगा। भारतीय धातु और खनन कंपनियों, खासकर स्टील उत्पाद की निर्माताओं को, फायदा होने की संभावना है।

भारतीय रुपये की हालिया गिरावट दवा और टेक्सटाइल्स जैसे उच्च-गुणवत्ता वाले, निर्यात-उन्मुख कारोबारों के लिए भी अच्छा संकेत है। मुद्रा में तेज गिरावट इन कारोबारों के लिए टैरिफ कटौती  जैसी है क्योंकि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के भीतर उनकी प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।

हाल के हफ्तों में लार्ज कैप शेयरों के मुकाबले मिड और स्मॉल कैप ज्यादा तेजी से बढ़े हैं। क्या यह रुझान जारी रहेगा? 

हमें उम्मीद है कि यह रुझान जारी रहेगा, क्योंकि इन कंपनियों की कमाई में बेहतर वृद्धि की संभावनाएं हैं। इस सेगमेंट में स्मॉल कैप कंपनियां फिलहाल बेहतर मूल्यांकन और कमाई में वृद्धि के ज्यादा अच्छे मौके दे रही हैं। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के कारण सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों, को लेकर जो चिंताएं उभरी हैं, उनका असर लार्जकैप कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ा है। लेकिन कई छोटी कंपनियां बिजली और पूंजीगत सामान की वैल्यू चेन से फायदा उठा रही हैं और वे पूंजीगत व्यय से जुड़ी गतिविधियों से लाभ कमाने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।

आप अभी बाजार मूल्यांकन का आकलन कैसे करते हैं? क्या इससे विदेशी निवेश वापस आ सकता है? 

अभी निफ्टी 50 करीब 19 से 20 गुना फॉरवर्ड पीई मल्टीपल्स पर कारोबार कर रहा है, जो मोटे तौर पर पिछले 10 सालों के इसके औसत मूल्यांकन के बराबर है। हाल की सापेक्ष कमजोरी के बाद दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में मूल्यांकन प्रीमियम भी ऐतिहासिक स्तरों के मुकाबले कम हो गया है। हमारा मानना ​​है कि बाजार का मूल्यांकन उचित हैं।

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First Published - May 28, 2026 | 9:59 PM IST

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