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डीमैट की दूसरी लहर: नॉन-लिस्टेड कंपनियों में इलेक्ट्रॉनिक शेयरों का चलन तेज, इश्यूर की संख्या 1 लाख के पार

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योजना-वार आंकड़ों पर नजर डालने से पता चलता है कि सूचीबद्ध इक्विटी क्षेत्र में डीमैट जारीकर्ताओं की संख्या वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2025 के बीच 10 प्रतिशत से भी कम बढ़ी

Last Updated- December 26, 2025 | 10:03 PM IST
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Second wave of demat: 1990 के दशक के मध्य में जब सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों को पहली बार इलेक्ट्रॉनिक या डीमैट रूप में रखा जाने लगा, तो शेयर बाजारों पर खरीदे और बेचे जाने वाले शेयरों में उनकी भागीदारी 1 प्रतिशत से भी कम थी। लेकिन 2001 तक यह संख्या बढ़कर 99.5 प्रतिशत पर पहुंच गई। डीमैटीरियलाइजेशन (डीमैट) यानी शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाने की ऐसी ही एक दूसरी हवा अब चल रही है। लेकिन इस बार तेजी उन कंपनियों के मामले में देखी जा रही है जो सूचीबद्ध नहीं हैं।

नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार यही कारण है कि डीमैट रूम में प्रतिभूतियां या शेयर जारी करने वाली कंपनियों की संख्या वित्त वर्ष 2022-23 में लगभग 40,000 से बढ़कर नवंबर 2025 तक एक लाख से अधिक हो गई है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (सीडीएसएल) में भी जारीकर्ताओं की संख्या लगभग 20,000 से दोगुनी होकर 40,000 से अधिक हो गई है।

यह विश्लेषण भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की हाल में जारी ‘सांख्यिकी पुस्तिका’ पर आधारित है। इसमें एनएसडीएल और सीडीएसएल की ओर से किए गए खुलासों से संकलित अतिरिक्त नए आंकड़े हैं।

योजना-वार आंकड़ों पर नजर डालने से पता चलता है कि सूचीबद्ध इक्विटी क्षेत्र में डीमैट जारीकर्ताओं की संख्या वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2025 के बीच 10 प्रतिशत से भी कम बढ़ी। इसी अवधि में गैर-सूचीबद्ध इक्विटी जारीकर्ताओं की संख्या में 110 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ, जिससे पता चलता है कि अधिकांश बढ़ोतरी इसी क्षेत्र में हुई है।

अक्टूबर 2023 में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने निजी कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया था कि वे केवल डीमैट रूप में ही प्रतिभूतियां जारी करेंगी और मौजूदा भौतिक प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में तब्दील करने की सुविधा देंगी। फरवरी में इससे संबंधित समय सीमा को इस वर्ष जून तक बढ़ा दिया गया था।

कंपनी सचिव गौरव पिंगले के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक शेयरहोल्डिंग की तरफ बढ़ने से कई मकसद पूरे होते हैं, जिसमें बेहतर पारदर्शिता और बेहतर कर अनुपालन मुख्य रूप से शामिल हैं। यह स्टांप शुल्क में ज्यादा एकरूपता की दिशा में कदम होगा, जो इस बात पर निर्भर करता है कि शेयर फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे गए हैं या नहीं। इससे गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए कुछ अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं, जो कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत बनाई गई हैं।

कोयंबटूर स्थित कंपनी सचिव के एस रविचंद्रन डीमैटीरियलाइजेशन शुरू होने से पहले से ही प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘धोखाधड़ी और जालसाजी लगभग खत्म हो गई है। ऐसे मामले अब लगभग शून्य रह गए हैं।’ रविचंद्रन केएसआर ऐंड कंपनी कंपनी सेक्रेटरीज के संस्थापक और प्रबंध भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि इस नए कदम से प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के लिए लागत और अनुपालन का बोझ बढ़ सकता है।

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First Published - December 26, 2025 | 9:56 PM IST

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