अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई पर लगे ब्रेक ने दुनिया के ज्यादातर देशों को अर्थव्यस्था को हिला दिया है। भारत समेत कई देश कच्चे तेल का ज्यादातर आयात इसी समुद्री रूट से करते हैं, जो कि पिछले दो महीने से बाधित है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी कि कम इन्वेंट्री, पश्चिम एशिया से कमजोर निर्यात और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के जोखिम के चलते जुलाई-अगस्त तक वैश्विक तेल बाजार में भारी तंगी आ सकती है। डिस्टिलेट मार्केट में इस तंगी के बीच चेन्नई पेट्रोलियम (CPCL) और मंगलोर रिफाइनरीज (MRPL) को फायदा हो सकता है।
होर्मुज व्यवधान के चलते तेल सप्लाई संकट के बीच यूएई ने 2027 तक होर्मुज के बाहर अपनी कच्चे तेल की निर्यात क्षमता दोगुनी करने की योजना की घोषणा की है, जिससे मध्य पूर्व के इस महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग पर निर्भरता कम होगी। इस बीच, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 23 मई को एक बार फिर 87-91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इसके साथ ही पिछले 10 दिनों में ईंधन कीमतों में कुल बढ़ोतरी लगभग 5 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
ब्रोकरेज हाउस च्वाइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने ऑयल एंड गैस सेक्टर पर अपनी रिपोर्ट ‘क्रूड कम्पास’ में कहा कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही सीमित बनी हुई है, तब तक यूरोप और एशिया दोनों में मिडिल डिस्टिलेट बाजार में तंगी बनी रहेगी। ऐसे में CPCL और MRPL मौजूदा हालात के प्रमुख बेनिफशियरीज बन सकते हैं।
च्वाइस इक्विटीज ने दोनों ही स्टॉक्स पर BUY रेटिंग शुरू की है। MRPL के लिए टारेगट प्राइस 215 रुपये प्रति शेयर तय किया है। जोकि शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस (149 रुपये) से 44 फीसदी ज्यादा है। वहीं, CPCL के लिए टारगेट प्राइस 1,265 रुपये प्रति शेयर है। यह शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस (1,018 रुपये) से 24 फीसदी का अपसाइड है।
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ब्रोकरेज का कहना है कि अगर भारतीय रिफाइनरों के लिए GRM (ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन) लगभग 15 डॉलर प्रति बैरल तक सीमित रहता है और सरकार का अतिरिक्त दखल अप्रैल की शुरुआत में उठाए गए कदमों जैसा रहता है, जहां डीजल और ATF क्रैक का लगभग 50 प्रतिशत डिस्काउंट के रूप में लिया गया था। उस समय भी चालू वित्त वर्ष पहली तिमाही (Q1FY27) में इन रिफाइनरों के रेवेन्यू और कामकाजी मुनाफा (EBITDA) में सालाना आधार पर मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। बीते वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY26) का कमजोर आधार भी इसमें मदद करेगा। सरकार की ओर से 1 मई 2026 को डीजल और ATF पर निर्यात शुल्क कम करने के फैसले ने भी इस आउटलुक को सपोर्ट किया है।
रिपोर्ट का कहना है कि अगर मई 2026 के अंत तक होर्मुज स्थायी रूप से फिर से खुल जाता है, तो अप्रैल-जून 2026 के दौरान ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। सबसे खराब स्थिति में अगर गतिरोध लंबे समय तक बना रहता है और होर्मुज जलडमरूमध्य जुलाई के अंत तक नहीं खुलता, तो ब्रेंट की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। ऐसे में FY27 के दौरान ब्रेंट का औसत 98 डॉलर प्रति बैरल तक रह सकता है, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो सकती है। हालांकि, इस स्थिति की संभावना कम हैं।
च्वाइस ब्रोकिंग के बेस केस के अनुसार FY27 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि वैश्विक कच्चे तेल बाजार में 7-11 मिलियन बैरल प्रतिदिन की सप्लाई कमी बनी रह सकती है।
केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता ने समृद्ध यूरेनियम भंडार को देश के भीतर ही रखने का आदेश दिया, जिससे परमाणु शांति वार्ता और जटिल हो गई। तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना अमेरिका का अहम मकसद बना हुआ है। इस बीच, शुक्रवार को WTI क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
केडिया एडवाइजरी का कहना है कि अतिरिक्त भू-राजनीतिक चिंताएं तब बढ़ीं जब खबरें आईं कि ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री रूट पर स्थायी टोल व्यवस्था बनाने पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और कहा कि यह मार्ग बिना किसी टोल के खुला रहना चाहिए।
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शुक्रवार की तेजी के बावजूद पूरे सप्ताह के दौरान WTI क्रूड वायदा कीमतें कुल मिलाकर 3 प्रतिशत से अधिक नीचे रहीं, क्योंकि व्यापक समझौते की उम्मीद बनी हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वार्ता को लेकर “उत्साहजनक संकेत” मिलने की बात कही, जबकि खबर है कि पाकिस्तानी मध्यस्थ जल्द ही तेहरान का दौरा कर सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)