facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

तेल बाजार में हलचल! ब्रोकरेज ने CPCL, MRPL के शेयरों पर क्यों दी BUY रेटिंग?

Advertisement

अगर गतिरोध लंबे समय तक बना रहता है और होर्मुज जुलाई के अंत तक नहीं खुलता, तो FY27 के दौरान ब्रेंट का औसत 98 डॉलर प्रति बैरल तक रह सकता है।

Last Updated- May 24, 2026 | 2:44 PM IST
Oil Stocks to buy
Representational Image

अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई पर लगे ब्रेक ने दुनिया के ज्यादातर देशों को अर्थव्यस्था को हिला दिया है। भारत समेत कई देश कच्चे तेल का ज्यादातर आयात इसी समुद्री रूट से करते हैं, जो कि पिछले दो महीने से बा​धित है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी कि कम इन्वेंट्री, प​श्चिम ए​शिया से कमजोर निर्यात और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के जोखिम के चलते जुलाई-अगस्त तक वैश्विक तेल बाजार में भारी तंगी आ सकती है। डिस्टिलेट मार्केट में इस तंगी के बीच चेन्नई पेट्रोलियम (CPCL) और मंगलोर रिफाइनरीज (MRPL) को फायदा हो सकता है।

होर्मुज व्यवधान के चलते तेल सप्लाई संकट के बीच यूएई ने 2027 तक होर्मुज के बाहर अपनी कच्चे तेल की निर्यात क्षमता दोगुनी करने की योजना की घोषणा की है, जिससे मध्य पूर्व के इस महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग पर निर्भरता कम होगी। इस बीच, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 23 मई को एक बार फिर 87-91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इसके साथ ही पिछले 10 दिनों में ईंधन कीमतों में कुल बढ़ोतरी लगभग 5 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

CPCL और MRPL मिल सकता है फायदा

ब्रोकरेज हाउस च्वाइस इंस्टीट्यूशनल इ​क्विटीज ने ऑयल एंड गैस सेक्टर पर अपनी रिपोर्ट ‘क्रूड कम्पास’ में कहा कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही सीमित बनी हुई है, तब तक यूरोप और एशिया दोनों में मिडिल डिस्टिलेट बाजार में तंगी बनी रहेगी। ऐसे में CPCL और MRPL मौजूदा हालात के प्रमुख बेनिफ​शियरीज बन सकते हैं।

च्वाइस इ​​क्विटीज ने दोनों ही स्टॉक्स पर BUY रेटिंग शुरू की है। MRPL के लिए टारेगट प्राइस 215 रुपये प्रति शेयर तय किया है। जोकि शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस (149 रुपये) से 44 फीसदी ज्यादा है। वहीं, CPCL के लिए टारगेट प्राइस 1,265 रुपये प्रति शेयर है। यह शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस (1,018 रुपये) से 24 फीसदी का अपसाइड है।

ये भी पढ़ें… क्या अब रुपये आधारित निवेश का समय? 5 प्वाइंट में समझें

ब्रोकरेज का कहना है कि अगर भारतीय रिफाइनरों के लिए GRM (ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन) लगभग 15 डॉलर प्रति बैरल तक सीमित रहता है और सरकार का अतिरिक्त दखल अप्रैल की शुरुआत में उठाए गए कदमों जैसा रहता है, जहां डीजल और ATF क्रैक का लगभग 50 प्रतिशत डिस्काउंट के रूप में लिया गया था। उस समय भी चालू वित्त वर्ष पहली तिमाही (Q1FY27) में इन रिफाइनरों के रेवेन्यू और कामकाजी मुनाफा (EBITDA) में सालाना आधार पर मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। बीते वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY26) का कमजोर आधार भी इसमें मदद करेगा। सरकार की ओर से 1 मई 2026 को डीजल और ATF पर निर्यात शुल्क कम करने के फैसले ने भी इस आउटलुक को सपोर्ट किया है।

ब्रेंट: 98 डॉलर रह सकती है औसत कीमत

रिपोर्ट का कहना है कि अगर मई 2026 के अंत तक होर्मुज स्थायी रूप से फिर से खुल जाता है, तो अप्रैल-जून 2026 के दौरान ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। सबसे खराब स्थिति में अगर गतिरोध लंबे समय तक बना रहता है और होर्मुज जलडमरूमध्य जुलाई के अंत तक नहीं खुलता, तो ब्रेंट की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। ऐसे में FY27 के दौरान ब्रेंट का औसत 98 डॉलर प्रति बैरल तक रह सकता है, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो सकती है। हालांकि, इस स्थिति की संभावना कम हैं।

च्वाइस ब्रोकिंग के बेस केस के अनुसार FY27 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि वैश्विक कच्चे तेल बाजार में 7-11 मिलियन बैरल प्रतिदिन की सप्लाई कमी बनी रह सकती है।

ईरान वार्ता तनाव के बीच WTI क्रूड में तेजी

केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता ने समृद्ध यूरेनियम भंडार को देश के भीतर ही रखने का आदेश दिया, जिससे परमाणु शांति वार्ता और जटिल हो गई। तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना अमेरिका का अहम मकसद बना हुआ है। इस बीच, शुक्रवार को WTI क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

केडिया एडवाइजरी का कहना है कि अतिरिक्त भू-राजनीतिक चिंताएं तब बढ़ीं जब खबरें आईं कि ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री रूट पर स्थायी टोल व्यवस्था बनाने पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और कहा कि यह मार्ग बिना किसी टोल के खुला रहना चाहिए।

ये भी पढ़ें… ट्रंप का दावा: ईरान समझौता लगभग तय, जल्द खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेट

शुक्रवार की तेजी के बावजूद पूरे सप्ताह के दौरान WTI क्रूड वायदा कीमतें कुल मिलाकर 3 प्रतिशत से अधिक नीचे रहीं, क्योंकि व्यापक समझौते की उम्मीद बनी हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वार्ता को लेकर “उत्साहजनक संकेत” मिलने की बात कही, जबकि खबर है कि पाकिस्तानी मध्यस्थ जल्द ही तेहरान का दौरा कर सकते हैं।

 

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

Advertisement
First Published - May 24, 2026 | 1:15 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement