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मार्केट कैप में भारत को पीछे छोड़ गया दक्षिण कोरिया, एक्सपर्ट्स ने बताई असली वजह

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दक्षिण कोरिया में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप इस साल 86 फीसदी बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है

Last Updated- June 02, 2026 | 8:24 AM IST
Stock Market

भारत का शेयर बाजार पिछले कुछ सालों में दुनिया के सबसे पसंदीदा बाजारों में गिना जाता रहा है। लेकिन इस साल तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आ रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग और चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में आई जबरदस्त तेजी की बदौलत दक्षिण कोरिया ने मार्केट कैप के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही दक्षिण कोरिया दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है।

दक्षिण कोरिया ने भारत को छोड़ा पीछे

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप इस साल 86 फीसदी बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है। दूसरी तरफ भारत का मार्केट कैप घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। दक्षिण कोरिया की इस छलांग में Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। ये दोनों कंपनियां अब उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई हैं जिनका संयुक्त बाजार मूल्य 1 ट्रिलियन डॉलर के क्लब तक पहुंच चुका है।

AI की दौड़ ने बदली तस्वीर

दुनियाभर में AI को लेकर निवेशकों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। AI के लिए जरूरी मेमोरी चिप और दूसरे हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है। दक्षिण कोरिया और ताइवान, दोनों ही चिप निर्माण के बड़े केंद्र हैं और इसी वजह से वैश्विक निवेशकों का पैसा इन बाजारों में तेजी से पहुंच रहा है।

रीड कैपिटल पार्टनर्स के मुख्य निवेश अधिकारी जेराल्ड गैन का कहना है कि यह तेजी दिखाती है कि दक्षिण कोरियाई टेक्नोलॉजी कंपनियां अगली तकनीकी क्रांति में भी अहम भूमिका निभाने वाली हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ AI का असर नहीं है बल्कि यह भी दिखाता है कि वैश्विक निवेश का रुख अब एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की ओर बढ़ रहा है, जिन्हें पहले पश्चिमी बाजारों के मुकाबले कम महत्व दिया जाता था।

राष्ट्रपति के सुधारों से भी मिला सहारा

दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार को सिर्फ AI का फायदा नहीं मिला है। राष्ट्रपति ली जे म्युंग की कॉर्पोरेट सुधार योजनाओं ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया का प्रमुख शेयर सूचकांक कोस्पी (Kospi) इस साल राष्ट्रपति के 5,000 अंकों के लक्ष्य को पार कर चुका है। अब वॉल स्ट्रीट के कुछ विश्लेषक इसके 10,000 अंक तक पहुंचने की संभावना जता रहे हैं।

लेकिन कुछ जानकारों की चिंता भी है

हालांकि हर कोई इस तेजी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। एसेट वैल्यू इन्वेस्टर्स के वरिष्ठ निवेश विश्लेषक रॉस मैकगैरी का कहना है कि इस साल की तेजी का बड़ा हिस्सा मेमोरी चिप कारोबार की मजबूती से आया है और Samsung तथा SK Hynix ने बाजार को ऊपर खींचने का काम किया है।

उनके मुताबिक, भारत के करीब पहुंचना और फिर उसे पीछे छोड़ना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। अगर दक्षिण कोरिया को इस नई वैल्यूएशन को लंबे समय तक बनाए रखना है तो उसे कॉर्पोरेट गवर्नेंस सुधारों को जमीन पर उतारना होगा।

भारत के बाजार पर क्यों बढ़ा दबाव?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का बाजार कई वजहों से दबाव में रहा है। कमजोर रुपया, विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से सीधे जुड़ी बड़ी कंपनियों की कमी ने भारतीय शेयर बाजार की रफ्तार को प्रभावित किया है। इसके अलावा ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है और आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर भी सवाल खड़े किए हैं। इसी वजह से विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयरों से करीब 26 अरब डॉलर की निकासी की है।

नतीजा यह हुआ कि भारत का प्रमुख शेयर सूचकांक इस साल अब तक करीब 11 फीसदी गिर चुका है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो एक दशक बाद पहली बार भारतीय बाजार सालाना गिरावट दर्ज कर सकता है।

क्या निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है?

जेराल्ड गैन का मानना है कि निवेशकों के बीच भारत की ग्रोथ स्टोरी की चमक कुछ फीकी पड़ी है। उनके मुताबिक, देश को घरेलू और वैश्विक राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे की पुरानी कमियां अब भी एडवांस विनिर्माण क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षाओं को प्रभावित कर रही हैं।

फिर भी अर्थव्यवस्था में भारत काफी आगे

हालांकि शेयर बाजार के आकार में दक्षिण कोरिया आगे निकल गया है, लेकिन अर्थव्यवस्था के मामले में भारत अब भी उससे काफी बड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था करीब 4.15 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था 1.93 ट्रिलियन डॉलर की है।

लंबी अवधि में भारत को लेकर उम्मीद बरकरार

सुमितोमो मित्सुई डीएस एसेट मैनेजमेंट के वरिष्ठ पोर्टफोलियो मैनेजर स्टेनली टैंग का कहना है कि भारत में निवेश का एक बड़ा तर्क यह रहा है कि जब प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर के स्तर के करीब पहुंचेगी तो घरेलू खपत में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

IMF के आंकड़ों के अनुसार, इस साल भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब 2,810 डॉलर है। स्टेनली टैंग का कहना है कि भारत की लंबी अवधि की विकास कहानी अब भी मजबूत है, लेकिन फिलहाल महंगाई निकट अवधि में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

यानी फिलहाल AI और चिप कंपनियों की बदौलत दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार भारत से आगे निकल गया है, लेकिन भारत की बड़ी अर्थव्यवस्था, मजबूत घरेलू मांग और लंबी अवधि की विकास संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों की नजरें अब भी भारत पर बनी हुई हैं। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)

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First Published - June 2, 2026 | 8:11 AM IST

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