गुजरात में खरीफ फसल की बुआई बेहतर
गुजरात में इस महीने हुई अच्छी बारिश से खरीफ फसल के बेहतर होने की उम्मीद बढ़ गई है। राज्य में छिटपुट हुई बारिश से खरीफ फसल के संदर्भ में अनिश्चितता बढ गई थी। हालांकि, पिछले पखवाड़े के दौरान इस स्थिति में नाटकीय बदलाव आया है। फिलहाल चल रहे खरीफ फसल की बुआई के सीजन में […]
काली मिर्च के उत्पादन में गिरावट का अनुमान
काली मिर्च के विभिन्न उत्पादक देशों की फसलों और भंडारों के नवीनतम आकलन के अनुसार इस साल काली मिर्च के वैश्विक बाजार में आपूर्ति की कमी हो सकती है। हालांकि, केरल के वयनाड और इडुक्की के काली मिर्च की खेती करने वाले किसानों के अनुसार दिसंबर से शुरू होने वाले अगले सीजन के दौरान उत्पादन […]
ओलंपिक ने डुबोई केमिकल उद्योग की लुटिया
चीन में चल रहे ओलंपिक खेलों की वजह से देश के केमिकल कारोबार के हालात आईसीयू में भर्ती मरीज की तरह हो चुके हैं। पिछले छह महीनों के भीतर ही देश केमिकल कारोबार का लगभग 40 फीसदी बाजार सिमट चुका है। देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों के केमिकल्स कारोबारियों का कहना है कि चीन में […]
तरक्की से कितने पास, कितने दूर
मुल्क को आजाद हुए आज 61 साल हो चुके हैं। आजादी के वक्त हमें सांप और सपेरों के देश के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज हमें कंप्यूटर और बीपीओ के मुल्क के नाम से पहचाना जाता है। आज हम दुनिया में सबसे तेजी से तरक्की करते हुए मुल्कों में से एक हैं। इस […]
नए भारत की नई महिलाएं
किसी भी मुल्क की हालत आप उस देश की महिलाओं के जीवन स्तर को देखकर ही बता सकते हैं।’ यह बात कही थी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने, वह भी आज से पचास साल पहले। आज हमें आजाद हुए 61 साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान भारतीय नारी का पात्र भी […]
उभरते भारत की नई तस्वीर
हर घड़ी के साथ बदलता वक्त अपने साथ कई चीजों में बदलाव लेकर आता है। एक वक्त था जब मोबाइल, लोगों का सपना हुआ करता था, लेकिन बेसिक फोन भी उनकी हकीकत नहीं बन पाता था। देश में आज भी बहुत सारे गांवों में बेसिक फोन पहुंच भी नहीं पाया है, लेकिन मोबाइल फोनों ने […]
रस्ता है कठिन, चलना जरा संभल के
हम बात आजादी की करते हैं। सवाल उठता है कि आखिर इस आजादी के मायने क्या हैं? कुछ लोगों के लिए आजादी पतंग की तरह उन्मुक्त होकर आसमान में उड़ जाने की चाहत का नाम हो सकता है। तो कुछ के लिए हर तरह के भय से मुक्ति का नाम आजादी है। दीगर बात है […]
साझा एशियाई बाजार
विश्व व्यापार वार्ता का दोहा दौर लंबा खिंचता जा रहा है और ऐसे में अगर कुछ मुल्क द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए)की ओर ताक रहे हैं तो इसमें गलत क्या है? इससे जाहिर होता है कि भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान का वह कदम बिलकुल भी गलत नहीं था […]
इंसाफ के तमाम रास्ते
न्याय पाने के कई रास्ते हैं, यह अलग बात है कि इनमें से कुछ रास्ते तय करने में समय कम लगता है और कुछ में ज्यादा। हक की लड़ाई लड़ने के लिए अगर उच्च या उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर की जाए तो यह रास्ता छोटा भी होता है और खर्च भी कम होता […]
देश में नई क्रांति ला सकता है बागवानी क्षेत्र
देश में अनाज उत्पादन के क्षेत्र में 1950 के बाद 4 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो चर्चा का विषय रही। इसे हरित क्रांति के परिणाम के रूप में देखा गया। वहीं इस दौरान बागवानी के क्षेत्र में 7 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिस पर कोई बहस नहीं हुई। बागवानी के क्षेत्र में हुई […]
