उड़ी रंगत दिल्ली के नाशपाती कारोबार की
प्रमुख नाशपाती उत्पादक राज्य पंजाब में अच्छी पैदावार के बावजूद दिल्ली की मंडियों में इसकी आवक पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 25 फीसदी कम है। आजादपुर मंडी में नाशपाती के थोक विक्रेताओं ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस साल दूसरे राज्यों में नाशपाती की ज्यादा आपूर्ति हुई है। यही कारण है कि दिल्ली की […]
निर्यात से चाय की कीमतों में 25 फीसदी का इजाफा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चाय की बढ़ती मांग और देश में उत्पादन कम होने से पिछले कुछ महीनों में चाय की कीमतों में 25 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है। हालांकि, चाय की मांग साल दर साल बढ़ी ही जा रही है। महंगाई के बढ़ने में इसकी भी भूमिका है। कारोबारियों के अनुसार, चार […]
केंद्र बिहार से खरीद सकता है मक्का
केंद्र सरकार 620 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी पर बिहार से मक्के की खरीदारी करने पर विचार कर रही है। मक्के के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इसकी कीमत न्यनतम समर्थन मूल्य से भी कम हो गई है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘खाद्य मंत्रालय बिहार से मक्के की खरीदारी करने पर सहमत […]
हम हैं नये तो अंदाज क्यूं हो पुराना?
दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो बने बनाए रास्ते के बजाए अपने लिए एक अनोखा रास्ता बनाते हैं। ऐसे लोग लीक से हटकर चलने वाले लोग कहे जाते हैं, जो अपने विचारों के मुताबिक सपने को पूरा करने में यकीन रखते हैं। आनंद प्रकाशहैंडमेड पेपर से बने डिजाइनदार सामान के जरिए बने सफल कारोबारीआनंद […]
सपनों को कैसे पूरा करे डीटीसी?
दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में करीब 3,600 बसें हैं। मौजूदा बसों में से तकरीबन आधे को बाहर करने के बाद भी अगले दो सालों में इस काफिले में 80 फीसदी बसें और शामिल हो जाएंगी। ऐसा नहीं है कि जिन बसों को अलविदा कहा जा रहा है वे पुरानी हो चुकी हैं, बल्कि […]
दिलफेंक कमलनाथ की राजनीतिक अदा है जुदा
कमलनाथ दूसरे नेताओं की तरह नहीं हैं। जहां मध्यप्रदेश के दूसरे दिग्गज नेता, अर्जुन सिंह शब्दों की मितव्ययिता के लिए प्रसिद्ध हैं, कमलनाथ शब्दों को लुटाते हैं। स्टाइल है- दिलफेंक, तपाक से जवाब देते हैं और हाजिरजवाब माने जाते हैं। ऐसे में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की वार्ता में कमलनाथ की भूमिका एकदम सटीक रही […]
निकम्मेपन का चोला ओढतीं निजी कंपनियां
आजकल एक अजीब सी बात हो रही है। इसने अब तक एक बड़े बदलाव की शक्ल अख्तियार नहीं की है, और न ही यह इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है कि माकपा की बांछें खिल जाएं। लेकिन आज आपको एक अजीब सा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी खून चूसने वाले और निकम्मे […]
बढ़ सकते हैं बैंकों के बैड लोन: क्रिसिल
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक असुरक्षित कर्जों यानी अनसेक्योर्ड लोन के बढ़ते अनुपात, ज्यादा जोखिम वाले ग्राहकों के प्रति बढ़ते एक्सपोजर, आसमान छूते ब्याज दर और क्रेडिट स्टैंडर्ड में 2004 से 2007 के दौरान आई गिरावट के कारण बैंकों के बैड लोनों में इजाफा देखने को मिल सकता है। खुदरा परिसंपत्तियां सावधानी का सूचक न […]
महिंद्रा एंड महिंद्रा- लंबी डगर
भारत में दुपहिया वाहनों का बाजार बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ है। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में पहले से ही कई खिलाड़ी पैर जमाए हुए हैं। इसमें होंडा और सुजुकी जैसे बड़े खिलाड़ी भी शामिल हैं। ऐसे हालातों में यह समझना मुश्किल है महिंद्रा और महिंद्रा इस सेगमेंट में क्यों प्रवेश करना चाहता है? […]
अब लेफ्ट का कोई डर नही, सरकार पकड़ सकती है विनिवेश की डगर
अब लेफ्ट पार्टियों के हटने के साथ ही सरकार के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियो (पीएसयू) के विनिवेश रास्ता साफ हो गया है। उसे ऑयल इंडिया लि., एनएचपीसी लि. और राइट्स समेत अन्य सभी कंपनियों के आईपीओ पर कुछ करने से पहले शेयर बाजार के फिर से बेहतर होने का इंतजार करती दिख रही है। […]
