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Budget 2026: टैक्स में कोई बड़ी कटौती नहीं होगी, पर सैलरीड क्लास को कुछ राहत मिलने की संभावना

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टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार टैक्स छूटों को बढ़ाने के बजाय, स्लैब को आसान बनाने और रिबेट बढ़ाकर न्यू टैक्स रिजीम को मजबूत करने पर फोकस करेगी

Last Updated- January 20, 2026 | 7:37 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026 पेश करने वाली हैं, जिसके चलते सैलरीड टैक्सपेयर्स में काफी उम्मीदें हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार नए इनकम टैक्स रिजीम पर ही फोकस रखेगी, स्लैब में कुछ बदलाव और टैक्स-फ्री लिमिट को और बढ़ाने की तरफ ध्यान देगी, बजाय डिडक्शन्स को बढ़ाने के।

फ्लाई हाई फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (फ्लाईहाई फाइनेंस) के फाउंडर और CEO ब्रजेश प्रणामी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा, “बजट 2026 में कोई बड़ी टैक्स कटौती की घोषणा नहीं होने वाली, लेकिन फिर भी कुछ अच्छी राहत मिल सकती है।”

कोचर एंड कंपनी के पार्टनर अमित श्रीवास्तव ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा, “सरकार का मकसद न्यू रिजीम को और ज्यादा आकर्षक बनाना लगता है, शायद बेसिक एग्जेम्प्शन बढ़ाकर, रिबेट को और मजबूत करके, और मिडिल इनकम ग्रुप (जैसे 8-20 लाख रुपये) में स्लैब राहत देकर डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाई जा सकती है।” 

क्या बजट 2026 में सिंगल इनकम टैक्स रिजीम पर शिफ्ट होगा?

जल्दी में पूरा शिफ्ट होने की उम्मीद कम है। श्रीवास्तव ने कहा, “एकदम से सिंगल रिजीम पर जाना मुश्किल लगता है, लेकिन धीरे-धीरे न्यू रिजीम को डिफॉल्ट बनाकर और चॉइस को आसान करके आगे बढ़ाया जाएगा, जबकि पुराना रिजीम उन लोगों के लिए रहेगा जो डिडक्शन्स पर बहुत निर्भर हैं।”

प्रणामी को भी लगता है कि दोनों रिजीम जारी रहेंगे। उन्होंने कहा, “एकाएक सिंगल टैक्स रिजीम पर शिफ्ट करना लोगों के लिए परेशानी भरा होगा, इसलिए बजट 2026 में ड्यूल रिजीम ही रहने की संभावना है।” 

 उन्होंने आगे कहा, “लेकिन दिशा साफ है कि न्यू रिजीम को सादगी और छोटी-छोटी फायदों से डिफॉल्ट बनाया जाएगा। सरकार जबरदस्ती नहीं करेगी, बल्कि लोगों को धीरे-धीरे शिफ्ट होने का मौका देगी।”

Also Read: Budget 2026: क्या इस साल के बजट में निर्मला सीतारमण ओल्ड टैक्स रिजीम को खत्म कर देगी?

किस तरह की राहत मिल सकती है?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सैलरीड लोगों के लिए टारगेटेड राहत की गुंजाइश है। श्रीवास्तव ने कहा, “सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए अतिरिक्त राहत का सबसे आसान तरीका स्टैंडर्ड डिडक्शन में बदलाव है, क्योंकि ये सरल और सबके लिए फायदेमंद है, हालांकि राजस्व पर असर न पड़े, सरकार इस बात का ध्यान रखेगी।” 

उन्होंने कहा कि 80C, हाउसिंग लोन, इंश्योरेंस या रिटायरमेंट सेविंग्स जैसे पॉपुलर डिडक्शन्स में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है। “लंबे समय का प्लान डिडक्शन्स पर निर्भरता कम करके सिम्पल रिजीम में रेट्स बेहतर करना है।”

उनके मुताबिक, मिडिल इनकम वाले परिवारों को स्लैब या रिबेट से राहत मिलने की ज्यादा संभावना है, न कि नए एग्जेम्प्शन वाले प्लानिंग से। 

उन्होंने कहा, “कुछ अतिरिक्त फायदे टारगेटेड हो सकते हैं, जैसे सीनियर सिटिजन्स, पेंशनर्स या पहली बार टैक्स देने वालों या कम इनकम वालों के लिए।”

प्रक्रिया में सुधार की बात करते हुए प्रणामी ने कहा, “सैलरीड और छोटे टैक्सपेयर्स के लिए प्री-फिल्ड रिटर्न्स बढ़ाना और लगभग ऑटोमैटिक फाइलिंग से कंप्लायंस आसान हो जाएगा, बिना सख्ती के।”

उन्होंने कहा, “जब सिस्टम आसान होता है, तो लोग खुद-ब-खुद हिस्सा लेते हैं। फाइनेंशियल सर्विसेज में हम ये साफ देखते हैं कि आसान प्रोसेस से बेहतर रिजल्ट आते हैं, और इनकम टैक्स पर भी यही लागू होता है।” 

सस्ती हाउसिंग अभी भी लिस्ट में बरकरार

तीर्थ रियल्टीज के मैनेजिंग डायरेक्टर विजय रौंडल ने कहा, “मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए हाउसिंग से जुड़ी राहत की मांग बनी हुई है, खासकर जब प्रॉपर्टी की कीमतें और निर्माण खर्च बढ़ रहे हैं। मिडिल क्लास के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग अब सिर्फ घर नहीं, बल्कि स्थिरता पाने का जरिया बन गया है।” 

उन्होंने बजट से उम्मीदें बताईं:

  • अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए तेज अप्रूवल
  • मास हाउसिंग पर ज्यादा फोकस
  • बाहरी इलाकों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से रहने की सुविधा
  • रेंटल हाउसिंग स्कीम्स को सपोर्ट करने वाली पॉलिसी
  • पुराने घरों के रिन्यूअल प्रोग्राम
  • क्वालिटी से समझौता किए बिना सप्लाई बढ़ाने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप

रौंडल ने कहा, “एक ऐसा बजट जो सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर को फिजिकल एसेट्स के साथ मान्यता दे, वो भारत की मिडिल क्लास की सबसे बड़ी डिमांड पर सीधा असर डालेगा।”

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First Published - January 20, 2026 | 7:37 PM IST

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