facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

खाद्य तेल आयात के शुल्क पर दीर्घावधि की 3 से 5 नीतिगत योजनाओं की दरकार

Advertisement

शोध पत्र के अनुसार वर्ष 2011 से 2021 के दौरान भारत में कच्चे पाम ऑयल, रिफाइंड पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी के तेल पर शुल्क में 25 से अधिक बार बदलाव किया गया

Last Updated- October 14, 2025 | 11:45 PM IST
Soyabean Prices and soya oil

भारत के पास खाद्य तेल आयात के शुल्क पर दीर्घावधि 3 से 5 नीतिगत योजना होनी चाहिए। भारत के पास घरेलू प्रसंस्करण उद्योग की सुरक्षा के लिए कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेल पर न्यूनतम कम से कम 7.5 से 10 अंतर हो।

हालिया शोध पत्र, ‘भारत में खाद्य तेल क्षेत्र के शुल्क में उतार-चढ़ाव और साझेदारों के परिदृश्य’ में कहा गया कि खाद्य तेल के आयात शुल्क में अचानक से आयात शुल्क में बदलाव होने से थोक व खुदरा मूल्य प्रभावित होते हैं। इससे मूल्य श्रृंखला में हरेक प्रभावित होता है। यह शोध पत्र संयुक्त रूप से जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सेंटर फॉर इकनॉमिक स्टडीज ऐंड प्लानिंग (सीईएसपी, वेईके पॉलिसी एडवाइजरी ऐंड रिसर्च और एसोचैम ने प्रकाशित किया।

इस शोध पत्र के अनुसार वर्ष 2011 से 2021 के दौरान भारत में कच्चे पाम ऑयल, रिफाइंड पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी के तेल पर शुल्क में 25 से अधिक बार बदलाव किया गया। यह शुल्क संरक्षणवाद के दौर में करीब शून्य से लेकर 50 से 70 प्रतिशत से अधिक रहा था। शोधपत्र में कहा गया, ‘पिछले एक दशक में खाद्य तेलों पर आयात शुल्क ने असाधारण अस्थिरता दिखाई है।’

शोधपत्र में पाम तेल पर आयात शुल्क को संदर्भ बिंदु के रूप में इस्तेमाल किया गया। इसका कारण यह है कि पाम ऑयल भारत के वार्षिक खाद्य तेल आयात का लगभग 60 प्रतिशत है।

Advertisement
First Published - October 14, 2025 | 11:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement