केंद सरकार ने गन्ना किसानों को राहत देने का निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सीजन 2026-27 के लिए गन्ना किसानों के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में बढ़ोतरी कर दी है। यह निर्णय करीब 5 करोड़ गन्ना किसानों और 5 लाख चीनी मिल कर्मचारियों सहित कृषि आधारित उद्योग से जुड़े श्रमिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के कपास क्षेत्र में बाधाओं, घटती वृद्धि और गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए कपास उत्पादकता मिशन (2026-27 से 2030-31) के लिए 5659.22 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए हैं।
इस बीच, केंद्र सरकार ने किसानों के एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक में रबी 2026 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 9,023 टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है, वहीं महाराष्ट्र में रबी 2025-26 सीजन के दौरान चने की अधिकतम खरीद सीमा बढ़ाकर 8,19,882 टन कर दी गई है। इन दोनों फैसलों के जरिए किसानों को 4,886.46 करोड़ रुपये से अधिक की एमएसपी सुरक्षा उपलब्ध होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट समिति ने 2026-27 (अक्टूबर–सितंबर) के लिए गन्ना का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह इससे पहले वाले वर्ष के एफआरपी 355 रुपये से 2.81 फीसदी अधिक है। यह मूल्य 10.25 फीसदी आधार रिकवरी दर पर लागू होगा। यदि रिकवरी 10.25 फीसदी से अधिक होती है तो प्रत्येक 0.1 फीसदी वृ द्धि पर 3.56 रुपये क्विंटल का प्रीमियम मिलेगा और 10.25 फीसदी से कम रिकवरी होने पर प्रत्येक 0.1 फीसदी कमी पर 3.56 रुपये क्विंटल की कटौती की जाएगी।
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि यदि किसी चीनी मिल की रिकवरी 9.5 फीसदी से कम है, तो किसी भी कटौती का प्रावधान नहीं होगा। ऐसे किसानों को आगामी 2026-27 सत्र में 338.3 रुपये/क्विंटल मिलेगा।
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केंद्र सरकार ने गन्ने की उत्पादन लागत (A2+FL) 2026-27 सत्र के लिए 182 रुपये क्विंटल तय की है। यह लागत तय एफआरपी 365 रुपये क्विंटल होने 100.5 फीसदी अधिक है। यह एफआरपी पिछले सत्र 2025-26 की तुलना में 2.81 फीसदी अधिक है। सरकार द्वारा तय की गई एफआरपी 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले 2026-27 के गन्ना सत्र में किसानों से गन्ना खरीद के लिए लागू होगा।
इस साल गन्ना किसानों को देय राशि के भुगतान में थोड़ी सुस्ती देखने को मिल रही है। पिछले गन्ना सत्र 2024-25 में किसानों को 1,02,209 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य भुगतान किए गए, जो देय राशि 1,02,687 करोड़ रुपये का लगभग 99.5 फीसदी है। वर्तमान सत्र 2025-26 में 20 अप्रैल 2026 तक 99,961 करोड़ रुपये भुगतान किए गए हैं, जो देय राशि 1,12,740 करोड़ रुपये का लगभग 88.6 फीसदी है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि सरकार ने किसानों के फायदे के लिए गन्ने का दाम तो बढ़ा दिया है, लेकिन इससे चीनी मिलों का खर्च भी बढ़ गया है। मिलों की मांग है कि इस बढ़े हुए खर्च को संतुलित करने के लिए सरकार चीनी के न्यूनतम दाम (MSP) और एथनॉल की कीमतों में भी बढ़ोतरी करे। अगर चीनी और एथनॉल के रेट समय पर बढ़ाए जाते हैं, तो मिलों की कमाई बढ़ेगी, जिससे वे बिना किसी आर्थिक तंगी के अपना काम जारी रख पाएंगी और किसानों को भी उनके गन्ने का पैसा समय पर दे सकेंगी।
