Chana Price: चना की कीमतों में आ रही गिरावट थम गई और इसके दाम अब बढ़ने लगे हैं। इसकी वजह चने की आवक में कमी, निचले भाव पर खरीद में वृद्धि और सरकारी खरीद में तेजी मानी जा रही है। इस तेजी के साथ ही चने के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,875 रुपये प्रति क्विंटल के करीब पहुंच गए हैं। कई बाजारों में तो भाव एमएसपी पार भी चले गए हैं। बाजार जानकारों का मानना है कि आगे भी चने की कीमतों में मजबूती जारी रह सकती है।
बीते एक महीने से चना की कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। दिल्ली में महीने भर में चना के थोक भाव 300 रुपये बढ़कर 5,800 से 5,825 रुपये, इंदौर में 350 रुपये चढ़कर 5,950-6,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। बीते एक सप्ताह के दौरान भी चना की कीमतों में तेजी आई है। वहीं आयातित चना भी इस दौरान महंगा हुआ है। आस्ट्रेलिया से आने वाला चना 20 डॉलर चढ़कर 600 डॉलर प्रति टन हो गया है।
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भारत दलहन और अनाज संघ (IPGA) के मुताबिक घरेलू और आयातित चना की कीमतों में लगातार दूसरे सप्ताह तेजी दर्ज की गई। इसकी वजह मिलर और व्यापारियों की निचने भाव पर बेहतर खरीदारी, कम आवक और किसानों की धीमी बिक्री रही क्योंकि कीमतें एमएसपी से नीचे थीं।
केडिया एडवाइजरी के मुताबिक मई में पहले दो सप्ताह के दौरान अप्रैल की इसी अवधि की तुलना में आवक करीब 52 फीसदी घट गई । सरकारी खरीद से भी कीमतों में तेजी आई है। सरकार ने Nafed और NCCF को चने की एमएसपी पर खरीद तेज करने के निर्देश दिए। जिससे बाजार को सहारा मिला। चना और पीली मटर के आयात में कमी और आयात पेरिटी नकारात्मक रहने से भी चना महंगा हुआ है।
IPGA का कहना है चना की कीमतें अगले हफ्ते ज्यादा नहीं बढ़ेंगी। लेकिन जून में मॉनसून शुरू होने के बाद मांग धीरे-धीरे बढ़ सकती है। ऐसे में प्रोसेसरऔर व्यापारी खरीदारी बढ़ा सकते हैं क्योंकि चना के भाव बहुत गिरने की संभावना नहीं है। चना और पीली मटर के कम आयात, सीमित स्टॉक, आयात में निगेटिव पेरिटी भी चना की कीमतों को सहारा दे सकती है।
केडिया एडवाइजरी के मुताबिक कम आवक, सरकारी खरीद और घरेलू भंडार की कमी के कारण चना की कीमतों में आगे तेजी को समर्थन मिल सकता है। तकनीकी दृष्टिकोण से भी चना कीमतें निचले स्तर पर मजबूत आधार बना रही हैं। खरीदारों को हर गिरावट पर खरीद की रणनीति अपनानी चाहिए।