facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Edible Oil Price : बीते सप्ताह खाद्य तेल, तिलहन कीमतों में गिरावट का रुख

Advertisement
Last Updated- April 30, 2023 | 4:21 PM IST
Vegetable Oil Import

विदेशों में खाद्य तेलों का बाजार टूटने से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में लगभग सभी खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि सस्ते आयातित तेलों की वजह से देशी तेल-तिलहन बाजार में टिक नहीं रहे।

सरसों, सोयाबीन, मूंगफली तेल-तिलहन, बिनौला जैसे देशी तेल तो खप नहीं रहे दूसरी ओर आयातित सूरजमुखी, सोयाबीन का भी इतना आयात हो चुका है कि इनके भी लिवाल कम हो गये हैं।

कच्चे पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन में भी लिवाल कम हैं और सीपीओ के आयात में भी नुकसान है। ‘सॉफ्ट आयल’ (नरम तेल- सूरजमुखी, सोयाबीन इत्यादि) बेहद सस्ता होने से पामोलीन टिक नहीं पा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि देशी तेल इसलिए टूटे हुए हैं कि इनकी लागत अधिक बैठती है और सस्ते आयातित तेल, लिवाल की कमी के कारण टूट रहे हैं। इन आयातित तेलों का इतना अधिक आयात हो चुका है कि उन्होंने ऊंची लागत वाले देशी तेल-तिलहनों को गैर-प्रतिस्पर्धी बना दिया है। सूत्रों ने कहा कि तिलहन किसान बहुत तकलीफ में हैं और उनके बीच नाराजगी भी दिख रही है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को आयात शुल्क लगाना चाहिये और उससे जो राजस्व की प्राप्ति हो, उसमें से कुछ धन सब्सिडी के बतौर वह गरीब या निम्न मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के खाते में सीधा दे सकती है। इससे स्थिति पर काफी नियंत्रण हो सकता है।

विश्व में भारत खाद्य तेलों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और यहां काफी अत्यधिक मात्रा में खाद्य तेलों का आयात किया जाता है इसलिए भारत के शुल्क लगाने के कदम के कारण विदेशों में भी खाद्य तेल का बाजार टूटने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, पिछले सप्ताहांत के मुकाबले बीते सप्ताह सरसों दाने का थोक भाव 150 रुपये की गिरावट के साथ 4,850-4,950 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताहांत में सरसों दादरी तेल 350 रुपये घटकर 9,250 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों पक्की घानी तेल का भाव 20-20 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 1,550-1,620 रुपये और 1,550-1,660 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ। सूत्रों ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज का भाव क्रमश: 100 रुपये और 120 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 5,210-5,260 रुपये और 4,960-5,040 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

विदेशों में दाम टूटने के कारण समीक्षाधीन सप्ताहांत में सोयाबीन दिल्ली, सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम तेल के भाव क्रमश: 450 रुपये, 450 रुपये और 500 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 10,250 रुपये, 10,000 रुपये और 8,500 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

समीक्षाधीन सप्ताह में मूंगफली तिलहन, मूंगफली गुजरात और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड के भाव क्रमश: 55 रुपये, 60 रुपये और 20 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 6,750-6,810 रुपये, 16,650 रुपये और 2,520-2,785 रुपये प्रति टिन पर बंद हुए। इसी तरह कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव 250 रुपये घटकर 8,600 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। जबकि पामोलीन दिल्ली का भाव 400 रुपये घटकर 9,850 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

पामोलीन कांडला का भाव भी 450 रुपये के गिरावट के साथ 8,950 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। गिरावट के आम रुख के अनुरूप बिनौला तेल भी समीक्षाधीन सप्ताह में 450 रुपये की हानि दर्शाता 8,800 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

Advertisement
First Published - April 30, 2023 | 12:37 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement