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क्रैश जारी रहेगा? एक्सपर्ट बोले- सोना ₹1.15 लाख और चांदी ₹1.75 लाख तक फिसल सकती है

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53 दिनों में बड़ी गिरावट के बाद भी दबाव बरकरार, एक्सपर्ट्स बोले- ब्याज दर, डॉलर मजबूती और वैश्विक तनाव बना रहे खतरा

Last Updated- March 23, 2026 | 1:14 PM IST
Gold and silver rate today

Gold and Silver Price Crash: सर्राफा बाजार में हाल के दिनों में ऐसी तेज गिरावट देखने को मिली है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है। सोना और चांदी, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, उनमें भी भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। 27 जनवरी के बाद सिर्फ 53 दिनों में चांदी करीब आधी रह गई है, जबकि सोने में भी करीब एक चौथाई की गिरावट आ चुकी है। यह गिरावट केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी दबाव में हैं। केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह केवल सामान्य मुनाफावसूली नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते डर, बिकवाली और ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदों का असर है।

53 दिनों में सोना-चांदी की चमक फीकी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर चांदी ने 27 जनवरी के आसपास 4,20,048 रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद इसमें तेज गिरावट शुरू हुई और अब यह करीब 2,06,360 रुपये प्रति किलो के आसपास आ गई है। यानी चांदी ने बहुत कम समय में अपनी कीमत का बड़ा हिस्सा गंवा दिया है। सोने की बात करें तो उसने भी इसी अवधि में 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम का हाई बनाया था, लेकिन अब इसके भाव करीब 1,35,800 रुपये तक फिसल गए हैं। इतनी तेज गिरावट ने बाजार में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सुरक्षित माने जाने वाले बुलियन में भी जोखिम उम्मीद से ज्यादा बढ़ गया है।

सिर्फ बुलियन नहीं, हर एसेट क्लास में दबाव

केडिया एडवाइजरी का कहना है कि यह गिरावट अकेले सोना-चांदी की कहानी नहीं है। दरअसल, वैश्विक बाजारों में इस समय निवेशकों का रुख जोखिम से बचने वाला हो गया है। रियल एस्टेट, क्रिप्टोकरेंसी, इक्विटी और कमोडिटी जैसे अलग-अलग एसेट क्लास में दबाव देखा जा रहा है। रिपोर्ट में खासतौर पर दुबई के रियल एस्टेट बाजार, क्रिप्टो बाजार और शेयर बाजार में भी बिकवाली की ओर इशारा किया गया है। इसका मतलब यह है कि निवेशक फिलहाल ज्यादा जोखिम लेने के बजाय नकदी या डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर झुक रहे हैं। जब बाजार में व्यापक बिकवाली का माहौल बनता है, तब सोना-चांदी जैसे एसेट भी दबाव से बच नहीं पाते।

यह भी पढ़ें: Gold-Silver Price Today: सोना ₹7,800 से ज्यादा लुढ़का, ₹13000 से ज्यादा फिसली चांदी; चेक करें ताजा भाव

अमेरिकी फेड के सख्त रुख ने बढ़ाया दबाव

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में से एक अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख माना जा रहा है। पहले बाजार को उम्मीद थी कि 2026 में अमेरिका में ब्याज दरों में कई कटौती हो सकती है। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार अब मान रहा है कि दरों में कटौती सीमित रह सकती है, या फिर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। यहां तक कि कुछ संभावना दरें बढ़ने की भी जताई जा रही है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तब सोने जैसे ऐसे एसेट, जो कोई ब्याज नहीं देते, उनका आकर्षण घट जाता है। यही वजह है कि डॉलर मजबूत हुआ है और बुलियन पर दबाव बढ़ा है।

महंगाई का डर और तेल की चिंता

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी के अनुसार, बढ़ती महंगाई की चिंता भी सोने पर दबाव बढ़ाने वाली बड़ी वजह है। आमतौर पर महंगाई के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह तनाव लगातार चौथे हफ्ते तक जारी है और हालात आसान होते नहीं दिख रहे। अमेरिका की ओर से ईरान पर दबाव बढ़ाया गया है, जबकि ईरान ने भी कड़े जवाब के संकेत दिए हैं। इससे ऊर्जा सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ी है।

तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। बाजार को डर है कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा, तो दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय सख्त रुख बनाए रखेंगे। यही वजह है कि सोने की पारंपरिक सुरक्षित निवेश वाली छवि फिलहाल कमजोर पड़ती दिख रही है। निवेशक अब यह सोच रहे हैं कि ऊंची महंगाई और ऊंची ब्याज दरों के दौर में सोने से बेहतर रिटर्न कहीं और मिल सकता है।

ETF से निकासी ने भी बिगाड़ी चाल

केडिया एडवाइजरी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ में सोने को लेकर निवेशकों का उत्साह कमजोर पड़ा है। पहले जहां ETF में अच्छी खरीदारी देखने को मिलती थी, वहीं अब निकासी बढ़ने लगी है। जब बड़े फंड और संस्थागत निवेशक सोने से पैसा निकालते हैं, तो कीमतों पर और दबाव बनता है। यानी इस बार गिरावट सिर्फ छोटे निवेशकों की घबराहट से नहीं, बल्कि बड़े निवेशकों की बदलती रणनीति से भी जुड़ी हुई है।

Gold and Silver Price Crash: आगे और गिर सकते हैं दाम

केडिया एडवाइजरी का मानना है कि निकट अवधि में सोना और चांदी में कमजोरी बनी रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, सोना आगे चलकर 1,15,000 रुपये तक का स्तर छू सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके लिए 3,450 से 3,500 डॉलर प्रति औंस का दायरा बताया गया है। इसी तरह चांदी भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है, जिसका घरेलू एमसीएक्स भाव करीब 1,75,000 रुपये प्रति किलो के आसपास बैठता है। यानी रिपोर्ट यह संकेत दे रही है कि अभी गिरावट पूरी तरह थमी नहीं है और बुलियन बाजार में आगे भी दबाव बना रह सकता है।

क्या बाद में रिकवरी आ सकती है

हालांकि रिपोर्ट पूरी तरह नकारात्मक तस्वीर नहीं दिखाती। केडिया एडवाइजरी का कहना है कि इतिहास यह बताता है कि युद्ध या बड़े भू-राजनीतिक तनाव के शुरुआती चरण में अक्सर सोना-चांदी में तेज गिरावट या उतार-चढ़ाव देखा जाता है, लेकिन बाद के चरण में इनमें रिकवरी भी आती है। यानी अभी अगर बाजार घबराहट में है, तो यह हमेशा के लिए नहीं हो सकता। साल के दूसरे हिस्से में, अगर हालात स्थिर होने लगते हैं या निवेशकों को लगे कि गिरावट बहुत ज्यादा हो चुकी है, तो सोना-चांदी को फिर से सहारा मिल सकता है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

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First Published - March 23, 2026 | 1:04 PM IST

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