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सरकार ने सोने-चांदी पर बढ़ाया टैक्स, एक्सपर्ट बोले- 2013 जैसी स्थिति लौट सकती है

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार को राहत मिल सकती है, लेकिन तस्करी और ग्रे मार्केट का खतरा भी बढ़ सकता है

Last Updated- May 13, 2026 | 12:20 PM IST
Gold

Gold Import Duty: सरकार ने सोना और चांदी पर प्रभावी इंपोर्ट टैक्स बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह करीब 6 प्रतिशत था। इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में सोना और चांदी अचानक महंगे हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 10 मई वाली अपील के तुरंत बाद आया है, जिसमें उन्होंने लोगों से अनावश्यक खर्च और आयात पर निर्भरता कम करने की बात कही थी। सरकार का मकसद सोना-चांदी के आयात को कम करना, विदेशी मुद्रा भंडार बचाना और रुपये को सहारा देना है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता देश है। यहां सोने की मांग सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि शादी, त्योहार और पारिवारिक बचत से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में बाजार में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या सिर्फ टैक्स बढ़ाने से सोने की मांग कम होगी या फिर इसका दूसरा असर देखने को मिलेगा।

कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने कहा कि यह फैसला विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए लिया गया है। उनके मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में जो तेजी दिख रही है, वह किसी नई मांग की वजह से नहीं बल्कि बढ़े हुए इंपोर्ट टैक्स की वजह से हुई ‘री-प्राइसिंग’ है।

उन्होंने कहा कि आगे चलकर भारत में सोने और चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर-रुपया विनिमय दर और घरेलू प्रीमियम के आधार पर तय होंगी।

अनिंद्य बनर्जी का मानना है कि लंबी अवधि में सोने और चांदी पर उनका नजरिया अब भी मजबूत बना हुआ है। उनके मुताबिक, डॉलर पर निर्भरता कम करने की वैश्विक कोशिशें, केंद्रीय बैंकों की खरीद और करेंसी कमजोर होने का डर सोने को सपोर्ट देगा। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले 12 से 18 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।

ज्वेलरी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है

बजाज ब्रोकिंग के रिसर्च हेड सुमित सिंघानिया का कहना है कि सरकार का यह कदम आयात कम करने और ट्रेड डेफिसिट पर दबाव घटाने के मकसद से उठाया गया है। उनके मुताबिक, इसका सबसे बड़ा असर ज्वेलरी कंपनियों पर पड़ सकता है। Titan Company, Kalyan Jewellers और Sky Gold & Diamonds जैसी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि महंगा सोना ग्राहकों की खरीदारी को प्रभावित कर सकता है। खासकर सिक्के, मेडेलियन और ज्वेलरी जैसी डिस्क्रिशनरी खरीद पर असर देखने को मिल सकता है।

हालांकि उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ Muthoot Finance और Manappuram Finance जैसी गोल्ड लोन कंपनियों को फायदा हो सकता है। सोने की कीमतें बढ़ने से गोल्ड लोन के बदले रखे गए गहनों की वैल्यू बढ़ जाती है, जिससे इन कंपनियों का कारोबार मजबूत हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार के फैसले के बाद MCX पर सोना और चांदी के वायदा भाव में करीब 6 प्रतिशत तक तेजी देखने को मिली।

सिर्फ ड्यूटी बढ़ाने से मांग कम नहीं होगी

वहीं MyGold के फाउंडर और सीईओ अमोल बंसल ने चेतावनी दी कि सिर्फ इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से सोने की मांग कम नहीं होगी, बल्कि इससे ग्रे मार्केट और तस्करी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि 2024 में जब सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी घटाई थी, तब तस्करी में कमी देखने को मिली थी। लेकिन अब फिर से टैक्स बढ़ाने से अवैध कारोबार दोबारा बढ़ सकता है। अमोल बंसल के मुताबिक, भारत में करीब 35,000 टन सोना घरों और संस्थानों में निष्क्रिय पड़ा है। अगर इस सोने को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में लाया जाए, तो इंपोर्ट पर निर्भरता कम की जा सकती है। उन्होंने कहा कि गोल्ड मोबिलाइजेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किए बिना सिर्फ ड्यूटी बढ़ाने का असर सीमित रहेगा।

2013 जैसी स्थिति फिर बन सकती है

अर्थ भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर सचिन सावरिकर ने भी इस फैसले को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत में सोने की मांग सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि बचत और परंपरा से जुड़ी हुई है। ऐसे में कीमतें बढ़ने पर लोग वैकल्पिक और अनौपचारिक रास्तों की तरफ जा सकते हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में भी ड्यूटी बढ़ने के बाद सोने की तस्करी में तेज बढ़ोतरी हुई थी। सचिन सावरिकर के मुताबिक, सरकार को सिर्फ टैक्स बढ़ाने के बजाय गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम और गोल्ड आधारित वित्तीय उत्पादों को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि बिना फिजिकल इंपोर्ट के भी निवेश की मांग पूरी की जा सके। उन्होंने कहा कि यह फैसला अल्पकाल में सरकार के लिए सही संकेत हो सकता है, लेकिन लंबे समय में इसके कई दुष्प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं।

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First Published - May 13, 2026 | 12:10 PM IST

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