Gold Price Outlook: इस सप्ताह सोने की कीमतों की दिशा पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की चाल और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आर्थिक आंकड़े तय कर सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों की नजर अमेरिका और चीन के व्यापार एवं महंगाई के आंकड़ों, अमेरिकी उपभोक्ता भरोसा (कंज्यूमर सेंटिमेंट) और भारत की खुदरा महंगाई दर (CPI) पर रहेगी। विश्लेषकों के अनुसार, इसके साथ ही यूरोपीय केंद्रीय बैंक के मौद्रिक नीति निर्णय पर भी बाजार की नजर रहेगी, क्योंकि इससे सर्राफा और अन्य जिंस बाजारों पर असर पड़ सकता है।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के ईबीजी-जिंस एवं मुद्रा शोध के उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने कहा, ”सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए गति अब भी सुधारात्मक प्रतीत होती हैं।” घरेलू जिंस बाजार में सप्ताह का अंत गिरावट के साथ हुआ, जिसमें अगस्त माह में सप्लाई के लिए मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का वायदा भाव 5,317 रुपये या 3.3 फीसदी टूटकर 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। जुलाई सप्लाई वाली चांदी 18,461 रुपये यानी सात फीसदी गिरकर 2.48 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
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एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक जिंस एवं मुद्रा जतिन त्रिवेदी ने कहा, ”तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते निवेशकों का ध्यान सुरक्षित निवेश विकल्पों से हट गया, जिससे पिछले सप्ताह सोने का प्रदर्शन कमजोर रहा।” उन्होंने कहा कि रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर अतिरिक्त दबाव डाला, जिससे घरेलू बाजार अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में कमजोर रहा।
वैश्विक बाजारों में सोने का वायदा भाव 227.7 डॉलर या पांच फीसदी गिरकर 4,365 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी 6.77 डॉलर यानी करीब नौ फीसदी टूटकर 69.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। मेर ने कहा कि विदेशी व्यापार में सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा और सप्ताह के अंत में इसमें लगभग पांच फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि औद्योगिक धातुओं में तेजी से आई गिरावट के कारण चांदी की कीमतों में भी भारी कमी आई।
विश्लेषकों के अनुसार, रूस-यूक्रेन संघर्ष में संभावित समाधान के संकेतों ने भी सर्राफा की मांग को कम किया है। त्रिवेदी ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 4,400–4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे बनी रहती हैं, तो कीमती धातुएं दबाव में रह सकती हैं। साथ ही मजबूत रुपया, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और सतर्क निवेश धारणा किसी भी तेज सुधार को सीमित कर सकते हैं।
(PTI इनपुट के साथ)