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खेती में महिलाओं का बढ़ेगा दबदबा! महिला किसानों के लिए ICAR लाएगा नया ‘नेशनल जेंडर प्लेटफॉर्म’

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ICAR के नए 'नेशनल जेंडर प्लेटफॉर्म' और 'दिल्ली डिक्लेरेशन' के जरिए अब महिला किसानों को खेती में बराबरी का हक, नई तकनीक और नेतृत्व के बड़े अवसर मिलेंगे

Last Updated- March 15, 2026 | 3:49 PM IST
women farmers india
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश और दुनिया की खेती में महिलाओं की मेहनत तो हर कदम पर दिखती है, लेकिन अब उनकी इस भागीदारी को पहचान और नई ताकत मिलने जा रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने रविवार को एक बड़े कदम का ऐलान करते हुए कहा कि वह देश के 900 से अधिक संस्थानों को जोड़कर एक ‘नेशनल जेंडर प्लेटफॉर्म’ तैयार कर रहा है। इसका मकसद खेती-किसानी में महिलाओं की भूमिका को और मजबूत करना और उन्हें नेतृत्व की भूमिका में लाना है।

नई दिल्ली में आयोजित ‘ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन विमेन इन एग्री-फूड सिस्टम्स (GCWAS-2026)’ के समापन सत्र में ICAR के महानिदेशक एम.एल. जाट ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म ICAR के संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के बीच एक कड़ी का काम करेगा। इसके जरिए रिसर्च और ट्रेनिंग के कामों को सीधे महिलाओं तक पहुंचाया जाएगा, ताकि वे आधुनिक खेती में माहिर बन सकें।

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ग्लोबल अलायंस और दिल्ली डिक्लेरेशन

तीन दिनों तक चले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 18 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’ (दिल्ली घोषणापत्र) को अपनाना रहा। इसके तहत एक ‘ग्लोबल अलायंस’ यानी वैश्विक गठबंधन बनाने का फैसला लिया गया है। यह गठबंधन यह सुनिश्चित करेगा कि महिलाओं को जमीन, पैसा (फाइनेंस), नई टेक्नोलॉजी और डिजिटल इनोवेशन में उनका जायज हक मिले। साथ ही, अब इस बात पर भी जोर रहेगा कि समय-समय पर ‘जेंडर ऑडिट’ किया जाए ताकि जवाबदेही तय हो सके।

सम्मेलन में पूर्व DBT सचिव रेणु स्वरूप ने सुझाव दिया कि नीतियों को सही ढंग से लागू करने के लिए जेंडर आधारित डेटा जुटाना बहुत जरूरी है। वहीं, ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) के चेयरमैन आर.एस. परोदा ने एक कड़वी सच्चाई सामने रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में खेती के 60 से 70 फीसदी कामों में महिलाएं हाथ बंटाती हैं, लेकिन जब बात कर्ज, बाजार या बड़े फैसलों की आती है, तो उन्हें बाहर रखा जाता है। अब वक्त बातचीत से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई करने का है।

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प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फार्मर्स राइट्स ऑथोरिटी (PPV&FRA) के चेयरमैन त्रिलोचन महापात्रा ने उन महिलाओं का जिक्र किया जो सदियों से पारंपरिक बीज और खेती के ज्ञान को सहेज रही हैं। उन्होंने कहा कि जैव विविधता को बचाने में इन महिलाओं के योगदान को पहचान और आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 12 मार्च को शुरू किए गए इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और नई तकनीकों जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

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First Published - March 15, 2026 | 3:49 PM IST

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