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पश्चिम एशिया संकट का बड़ा असर: भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल 20% बढ़ने का अनुमान

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पश्चिम एशिया संकट के चलते उर्वरक सब्सिडी 20% तक बढ़ सकती है। हालांकि, सरकार ने किसानों के लिए यूरिया और डीएपी की कीमतों को स्थिर रखने का वादा किया है

Last Updated- April 27, 2026 | 10:25 PM IST
Fertilizer
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया संकट के कारण विश्व के सबसे बड़े उर्वरक आयातक भारत के सब्सिडी बिल में वित्त वर्ष 2027  में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद है। उर्वरक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह कहा।

भारत ने खरीफ सीजन में अधिक दाम पर 64 लाख टन यूरिया और 19 लाख टन अन्य उर्वरकों के आयात का फैसला किया है, जिससे सब्सिडी बढ़ने की उम्मीद है।  पश्चिम एशिया संकट के पहले फरवरी में पेश केंद्रीय बजट में केंद्र ने वित्त वर्ष 2027 के लिए उर्वरक सब्सिडी 1,70,781 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था।  यह वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान 1,86,460 करोड़ रुपये से 8.40 प्रतिशत कम है। वित्त वर्ष 2026 में उर्वरक सब्सिडी का संशोधित अनुमान, वित्त वर्ष 2026 के बजट अनुमान से 11.06 प्रतिशत अधिक था।

भारत ने हाल ही में 25 लाख टन यूरिया आयात का ऑर्डर दिया है, जिसके लिए भुगतान की गई कीमत दो महीने पहले की कीमतों की तुलना में दोगुनी है, क्योंकि ईरान विवाद के कारण वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है  और  इसकी वजह से कीमत में तेजी आई है।

पश्चिम एशिया में ताजा स्थिति के असर को लेकर अंतरमंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान उर्वरक मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि भारत को चालू वित्त  वर्ष में उर्वरक सब्सिडी कम से कम 20 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के कारण कीमतों में तेजी आई है।  यूरिया और डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा और खरीफ सीजन में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता है। 

शर्मा ने कहा, ‘यूरियाकी 45 किलो की बोरी की वर्तमान वास्तविक (गैर-सब्सिडी वाली) कीमत 4,000 रुपये होने के बावजूद केंद्र इसे 266.5 रुपये प्रति किलो की अत्यधिक सस्ती दर पर प्रदान करना जारी रखेगा।’

आगे यूरिया और गैर यूरिया उर्रवकों के आयात पर फैसला घरेलू उत्पादन और मांग का आकलन करने के बाद किया जाएगा। एक अप्रैल से 26 अप्रैल के दौरान यूरिया की उपलब्धता 71.5 लाख टन रही है, जबकि जरूरत 18.1 लाख टन की है। यूरिया का पिछले साल 27 अप्रैल को भंडार 70.6 लाख टन था।  डीएपी की उपलब्धता 22.3 लाख टन है।

तेल आयात

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सरकार ऐसी स्थिति की उम्मीद नहीं करती है जहां भारत को घरेलू आवश्यकता के लिए पेट्रोल और डीजल के आयात पर निर्भर रहना पड़े। कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भरता के बावजूद भारत अपनी मजबूत रिफाइनिंग क्षमता के कारण पेट्रोल और डीजल का शुद्ध निर्यातक है।

आंध्र प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर ईंधन  न होने की खबरों के बाद राज्य में ईंधन के लिए लंबी कतारें लग गईं और घबराहट में खरीदारी हुई, जिसे देखते हुए संयुक्त सचिव का यह बयान आया है।   शर्मा ने कहा, ‘एचएसडी (हाई स्पीड डीजल) की बिक्री में 30 से 33 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि देखी गई है। इसकी वजह से कुछ पेट्रोल पंपों पर स्टॉक नहीं बचा। आज शाम तक सभी खुदरा आउटलेट्स पर स्टॉक पहुंच जाएगा।’

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First Published - April 27, 2026 | 10:14 PM IST

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