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2030 तक कच्चे तेल की मांग का बड़ा केंद्र बनेगा भारत: IEA रिपोर्ट

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IEW की रिपोर्ट के मुताबिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं और चीन में शुरुआत में सुस्ती आएगी और उसके बाद स्थिति उलट जाएगी।

Last Updated- February 07, 2024 | 10:01 PM IST
Oil

इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के ताजा अनुमान के मुताबिक अगले 7 साल में भारत तेल की वैश्विक मांग का सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगा, जबकि घरेलू उत्पादन 22 प्रतिशत कम हो जाएगा।

गोवा के बेतुल में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2024 में आईईए के अधिकारियों ने कहा कि इस बदलाव का व्यापक असर पड़ने की संभावना है। भारत पहले ही कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा शुद्ध आयातक बन गया है।

आईईडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं और चीन में शुरुआत में सुस्ती आएगी और उसके बाद स्थिति उलट जाएगी। हाल के वर्षों में नई खोज न होने से भारत का घरेलू तेल उत्पादन उत्पादन घटकर 2030 तक 5.40लाख बैरल रोजाना हो जाएगा, जो अभी 7 लाख बैरल रोजाना है।

साल 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत का कच्चे तेल का आयात 46 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है, जिसमें एक दशक में 36 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

बहुत कम मात्रा में तेल उत्पादन और निकट अवधि के हिसाब से वृद्धि की सीमित क्षमता के बीच भारत का घरेलू उत्पादन उसकी कुल जरूरतों का महज 13 प्रतिशत है। 2023 में घरेलू तेल उत्पादन औसतन करीब 7 लाख बैरल प्रतिदिन था।

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू खपत करीब 50 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) है। आईईए के निदेशक (ऊर्जा बाजार एवं सुरक्षा) किसुके सदामोरी ने कहा, ‘त्वरित हरित ऊर्जा कदमों के बावजूद 2030 तक भारत की तेल मांग तीव्र गति से बढ़ेगी। भारत की वृद्धि दर 2027 में चीन से आगे निकल जाएगी।’ हालांकि, भारत में मांग 2030 में भी चीन से पीछे रहेगी।

आईईए में तेल उद्योग एवं बाजार प्रभाग की प्रमुख टोरिल बोसोनी ने कहा, ‘जैसा कि विकसित देशों और चीन में तेल की मांग धीमी हो गई है, भारत वृद्धि का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।’

भारत वर्तमान में अमेरिका और चीन के बाद कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। वह अपनी तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत आयात करता है और घरेलू उत्पादन में गिरावट के कारण यह निर्भरता बढ़ने की संभावना है।

आईईए ने कहा, ‘भारत अबसे 2030 के बीच वैश्विक तेल मांग में वृद्धि का सबसे बड़ा स्रोत बन जाएगा, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं तथा चीन में शुरू में वृद्धि धीमी और बाद में इसके उलट रहने का अनुमान है।’

एजेंसी ने कहा है कि भारत को अपनी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है, जिससे तेल आपूर्ति के व्यवधानों से निपटा जा सके। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) कार्यक्रम को मजबूत बनाकर और तेल उद्योग की तैयारियां सुधारकर ऐसा किया जा सकता है।

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First Published - February 7, 2024 | 10:01 PM IST

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