कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा संभावित हस्तक्षेप के चलते रुपये में आज लगभग दो महीने में सबसे तेज एक दिवसीय वृद्धि दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.73 फीसदी बढ़कर 95 के स्तर पर बंद हुआ जो 8 मई के बाद का उच्चतम स्तर है। बुधवार को रुपया 95.70 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। सभी एशियाई मुद्राओं में रुपये का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा।
अमेरिका और ईरान द्वारा युद्ध विराम समझौते को बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के संकेत से ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 2 प्रतिशत गिरकर लगभग 91 डॉलर प्रति बैरल हो गईं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि रुपये को सहारा देने के लिए संभवत: सरकारी बैंकों ने भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से डॉलर की बिकवाली की है जिससे नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) मार्केट में परिपक्व हो रही पोजीशन से जुड़ी डॉलर की उच्च मांग के दबाव की भरपाई करने में मदद मिली।
एक सरकारी बैंक के एक डीलर ने कहा, ‘बाजार खुलने से पहले आरबीआई ने मुद्रा बाजार दखल दिया जिसके चलते रुपया एनडीएफ स्तर की तुलना में लगभग 20 पैसे मजबूत खुला।’
दिन के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 94.96 तक मजबूत हुआ जो 11 मई के बाद का उच्चतम स्तर था। रुपया पिछले सप्ताह डॉलर के मुकाबले 96.96 के न्यूनतम स्तर पर आ गया था। हालांकि बाद में दिनों में उसने अपने अधिकांश नुकसान की भरपाई कर ली। मई में रुपया डॉलर के मुकाबले महज 0.09 फीसदी नरम रहा।
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पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपये में लगभग 10 फीसदी की गिरावट आई है। 2026 में अभी तक डॉलर के मुकाबले इसमें 5.4 फीसदी की नरमी आई है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘कच्चे तेल की गिरती कीमतों और आरबीआई द्वारा संभावित हस्तक्षेपों से प्रेरित होकर रुपया अन्य एशियाई मुद्राओं से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘तकनीकी दृष्टि से हाजिर रुपये के 94.50 से 94.30 के स्तर तक आने की उम्मीद है जबकि उसे 95.70 के स्तर पर तत्काल प्रतिरोध बना हुआ है।’
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 22 मई को समाप्त सप्ताह में एक वर्ष से अधिक के निचले स्तर पर 681.38 अरब डॉलर तक गिर गया जो 11 अप्रैल, 2025 को समाप्त हुए सप्ताह के बाद से सबसे कम है।