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रासायनिक खाद से किसानों का मोहभंग? चालू खरीफ सीजन 3.5 गुना अधिक हुई जैविक खाद की खरीदारी

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चालू खरीफ सीजन में किसानों द्वारा पिछले साल से 3.5 गुना अधिक जैविक खाद खरीदना, रासायनिक खादों से जैविक खेती की ओर बढ़ते मजबूत रुझान को दर्शाता है

Last Updated- June 08, 2026 | 10:30 PM IST
Organic Fertilizer
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

चालू खरीफ सीजन में किसान जैविक खाद खूब खरीद रहे हैं। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि चालू खरीफ सीजन में किसानों ने 11.17 लाख टन जैविक खाद खरीदी है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3.5 गुना अधिक है। जैविक खाद की खरीद में इतनी बड़ी वृद्धि किसानों के रासायनिक उर्वरकों से धीरे-धीरे जैविक खाद की ओर बढ़ते रुझान का संकेत देती है। 

केंद्र सरकार ने फिर भरोसा दिलाया है कि देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और उनकी उपलब्धता को लेकर कोई समस्या नहीं है। किसानों को जरूरत के अनुसार उर्वरक मिलते रहें, इसके लिए सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है।

पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर एक अंतर-मंत्रालयीय ब्रीफिंग में रसायन और उर्वरक मंत्रालय में अपर सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा, ‘खरीफ सीजन 2026 के लिए कृषि विभाग ने उर्वरक की जरूरत का नया आकलन 383.9 लाख टन किया है। वर्तमान में देश में 197.56 लाख टन उर्वरक का स्टॉक मौजूद है। यह स्टॉक खरीफ सीजन की कुल मांग का 51 फीसदी है, जो सामान्य स्तर 33 फीसदी की तुलना में काफी ज्यादा है।’

उन्होंने कहा कि स्टॉक खरीफ सीजन की कुल मांग का 51 प्रतिशत से अधिक है, जो कि सामान्य 33 प्रतिशत के स्तर से काफी अधिक है।

शर्मा ने कहा, ‘वर्तमान खरीफ सीजन के लिए उर्वरक की खरीद लगभग 86.65 लाख टन रही है, जो कुल आवश्यकता का लगभग 22.57 प्रतिशत है।’

सचिव ने यह भी बताया कि किसानों ने इस सीजन में 11.17 लाख टन जैविक खाद खरीदी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में महज 3.2 लाख टन जैविक खाद खरीदी थी। जाहिर है, किसानों ने पिछले साल से 3.5 गुना अधिक जैविद खाद खरीदी। खेती में जैविक खाद और पोषक तत्त्वों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। किसान अब रासायनिक उर्वरकों की बजाय जैविक विकल्पों को चुनने लगे हैं। 

साथ ही, सचिव ने बताया कि उर्वरक की उपलब्धता में कोई बड़ी दिक्कत नहीं है। उर्वरक का घरेलू उत्पादन और आयात लगातार जारी है। संकट की स्थिति के बाद से कुल 147.4 लाख टन उर्वरक का आयात और घरेलू स्तर पर उत्पादन किया गया है। अकेले जून में ही 25 लाख टन से अधिक आयातित यूरिया, डीएपी और एनपीकेएस बंदरगाहों पर पहुंच चुका है।  इसके अलावा, 17 लाख टन यूरिया की आपूर्ति के लिए एक नई निविदा प्रक्रिया भी चल रही है।  

सरकार बजटीय प्रावधानों के अनुसार सभी सब्सिडी बिलों का भुगतान कर रही है। उर्वरक और कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सचिवों के सशक्त समूह की बैठकों में उच्चतम स्तर पर स्थिति की निगरानी की जा रही है। 2025 में घरेलू उत्पादन ने देश की कुल उर्वरक आवश्यकता का लगभग 73 प्रतिशत पूरा किया।  भारत बड़ी मात्रा में यूरिया और डीएपी का आयात करता है।

देश में वर्ष 2021 में उर्वरक का उत्पादन (जिसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी शामिल है) 433.29 लाख टन था, जो 2025 में बढ़कर रिकॉर्ड 524.62 लाख टन तक पहुंच गया। देश में वर्ष 2014-15 से 2024-25 के दौरान यूरिया का उत्पादन 225 लाख टन से बढ़कर 306.67 लाख टन हो गया।

देश ने बीते वित्त वर्ष में  100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया था। वित्त 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी का बजटीय आवंटन 1.71 लाख करोड़ रुपये है और वैश्विक बाजार उर्वरक दरों में वृद्धि के कारण आयात बिल बढ़ने की आशंका है। अभी नीम-कोटेड यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य  242 रुपये प्रति बैग (45 किलो) है, जबकि डीएपी का 1,350 रुपये प्रति बैग (50 किलो) है।

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First Published - June 8, 2026 | 10:24 PM IST

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