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Rice exports: 1,200 डॉलर प्रति टन से कम है बासमती चावल का रेट तो नही भेज सकेंगे विदेश, बैन के पीछे कई मकसद

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विदेश व्यापार नीति के अनुसार, APEDA को बासमती चावल के निर्यात के लिए सभी कॉन्ट्रैक्ट्स को रजिस्टर करना अनिवार्य है और फिर यह बासमती चावल के निर्यात के लिए RCAC जारी करता है

Last Updated- August 27, 2023 | 3:33 PM IST
Basmati rice

सरकार ने प्रीमियम बासमती चावल की आड़ में सफेद गैर-बासमती चावल के संभावित ‘अवैध’ निर्यात को रोकने के लिए 1,200 डॉलर प्रति टन से कम दाम के बासमती चावल के निर्यात की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।

वाणिज्य मंत्रालय ने रविवार को बयान में कहा कि उसने व्यापार संवर्धन निकाय कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) को 1,200 डॉलर प्रति टन से नीचे के अनुबंधों को पंजीकृत नहीं करने का निर्देश दिया है। मौजूदा 1,200 डॉलर प्रति टन से नीचे के कॉन्ट्रैक्ट्स को स्थगित रखा गया है।

क्या है सरकार का प्लान?

भविष्य के लिए एपीडा (APEDA) के चेयरमैन की अगुवाई में एक समिति गठित की जाएगी। चावल की खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास के तहत केंद्र सरकार घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है।

पिछले सप्ताह गैर-बासमती चावल के निर्यात पर लगा था बैन

पिछले साल सितंबर में केंद्र सरकार ने टूटे हुए चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, जबकि पिछले महीने उसने गैर-बासमती सफेद चावल पर प्रतिबंध लगाया था।

पिछले सप्ताह, उसना गैर-बासमती चावल पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया गया था। इन प्रतिबंधों के साथ भारत ने अब गैर-बासमती चावल की सभी किस्मों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

बासमती चावल के निर्यात पर बैन से क्या है सरकार का इरादा

वाणिज्य मंत्रालय के बयान के अनुसार, सरकार ने बासमती चावल की आड़ में सफेद गैर-बासमती चावल के संभावित अवैध निर्यात को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय शुरू करने के लिए एपीडा को निर्देश जारी किए हैं।

निर्देशों के अनुसार, ‘केवल 1,200 डॉलर प्रति टन और उससे अधिक मूल्य वाले बासमती निर्यात के अनुबंधों को पंजीकरण – सह – आवंटन प्रमाणपत्र (RCAC) जारी करने के लिए पंजीकृत किया जाना चाहिए।’

विदेश व्यापार नीति के अनुसार, एपीडा को बासमती चावल के निर्यात के लिए सभी कॉन्ट्रैक्ट्स को रजिस्टर करना अनिवार्य है और फिर यह बासमती चावल के निर्यात के लिए RCAC जारी करता है।

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First Published - August 27, 2023 | 3:33 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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