facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से रुपया गिरकर तीन हफ्ते के निचले स्तर पर

Advertisement

रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोर होकर गुरुवार को 94 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। डीलरों के अनुसार स्थानीय मुद्रा 94.11 प्रति डॉलर पर बंद हुई

Last Updated- April 23, 2026 | 10:34 PM IST
Rupee vs Dollar

पश्चिम एशिया संकट को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोर होकर गुरुवार को 94 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। डीलरों के अनुसार स्थानीय मुद्रा 94.11 प्रति डॉलर पर बंद हुई, जो 30 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है। इससे एक दिन पहले यह 93.80 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, डॉलर की हेजिंग से जुड़ी ज्यादा मांग और सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर व्यापक रुझान की वजह से डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94 के स्तर से नीचे आ गया है। केंद्रीय बैंक का दखल भी इस गिरावट को रोक नहीं पाया क्योंकि कच्चे तेल और अमेरिकी डॉलर दोनों में एक साथ आई तेजी ने रुपये पर और ज्यादा दबाव डाला। अल्पावधि में रुपया बुलिश दिखता है और 93.80 प्रति डॉलर के आसपास इसे समर्थन मिल सकता है और 94.60 प्रति डॉलर पर प्रतिरोध देखना पड़ सकता है।

मौजूदा कैलेंडर वर्ष में घरेलू मुद्रा के मूल्य में अब तक 4.50 फीसदी तक की गिरावट आई है। हालांकि अप्रैल में अब तक इसमें 0.74 फीसदी की बढ़त भी देखी गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 104 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में गतिरोध के कारण तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के लिए शांति प्रस्ताव पेश करने की कोई स्पष्ट समय सीमा तय नहीं की है जबकि बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। दूसरी ओर, ईरान अपनी प्रमुख मांगों पर समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहा है, जिससे नई बातचीत की गुंजाइश सीमित हो गई है। स्थिति प्रभावी रूप से एक गतिरोध पर पहुंच गई है, जहां दोनों पक्षों की ओर से जारी तनाव और प्रतिबंधों के बीच होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान बना हुआ है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, आरबीआई द्वारा सर्कुलर वापस लेने के बाद से भारतीय रुपया लगातार गिर रहा है और यह 92.70 से 94.20 तक पहुंच गया है। सिर्फ 4 दिनों में इसे 1.50 रुपये का नुकसान हुआ है।

आर्बिट्राज का मौका सिर्फ कंपनियों और बैंकों के लिए उपलब्ध है और वह भी 10 करोड़ डॉलर की सीमा तक (यह अधिकतम ओवरनाइट पोजीशन है जिसकी अनुमति है)। तेल कंपनियां बाजार में नहीं हैं। हालांकि एसबीआई को तेल कंपनियों के लिए हाजिर बाजार के जरिये डॉलर खरीदते देखा गया था, फिर भी आरबीआई की तमाम कोशिशों के बावजूद डॉलर की खरीदारी रुकी नहीं हुई है।

डॉलर इंडेक्स 98.75 पर था जबकि एक दिन पहले यह 98.30 पर रहा था। यह छह प्रमुख मुद्राओं के बास्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है।

Advertisement
First Published - April 23, 2026 | 10:09 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement