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रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: ईरान-अमेरिका तनाव और तेल कीमतों ने बढ़ाया दबाव

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डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मंगलवार को दिन के कारोबार में 95.44 के नए निचले स्तर तक चला गया

Last Updated- May 05, 2026 | 10:40 PM IST
Rupee vs Dollar

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मंगलवार को दिन के कारोबार में 95.44 के नए निचले स्तर तक चला गया। इसकी वजह ईरान और अमेरिका के बीच नाजुक संघर्षविराम टूटने की कगार पर होना और दोनों देशों का होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा करने की कोशिश करना था। इस कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आई। स्थानीय मुद्रा एक दिन पहले के बंद भाव 95.09 प्रति डॉलर के मुकाबले 95.29 के नए निचले स्तर पर बंद हुई।

ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं थी। लेकिन बाद में गिरकर 111 डॉलर पर आ गईं। इससे भारत के आयात बिल और महंगाई के अनुमान को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। रुपये में गिरावट से चालू खाता घाटा और बढ़ने तथा बाहरी संतुलन पर दबाव बने रहने की भी आशंका है। 

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने कहा, डॉलर के मुकाबले रुपये का अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचना, जो ऑनशोर स्पॉट पर अभी 95.34 है, पश्चिम एशिया से पड़ रहे लगातार दबाव का सीधा असर है। तेल और गैस की कीमतों को तय करने वाला सबसे बड़ा कारक अभी भी होर्मुज स्ट्रेट ही बना हुआ है और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये पर दोहरी मार डाल रही हैं।

भारत का मासिक ऊर्जा आयात बिल इस युद्ध से पहले औसतन 10-11 अरब डॉलर था। यह अब 70–80 फीसदी बढ़ गया है। इसके साथ ही तनाव बढ़ने के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी लगभग 21 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। चालू कैलेंडर वर्ष में रुपया अब तक 5.68 फीसदी कमज़ोर हुआ है जबकि चालू वित्त वर्ष में यह 0.5 फीसदी फिसला है। बनर्जी ने कहा, इन हालात के चलते आरबीआई को हाजिर और फॉरवर्ड दोनों ही बाजारों में करेंसी को बचाने के लिए जोरदार कदम उठाने पड़ रहे हैं। रुपया तथा उसकी और ज्यादा गिरावट के बीच खड़ी एकमात्र मजबूत ताकत अभी भी आरबीआई ही है।

इसके बावजूद रुपया उभरते बाजारों के अपने समकक्षों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन कर रहा है। यही वजह है कि ज्यादातर पैमानों पर अब वह अपनी असल कीमत से काफी कमजोर नज़र आ रहा है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि रुपये में गिरावट वैश्विक महंगाई और बाहरी असंतुलन को लेकर बढ़ती चिंताओं को दिखाती है। 

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First Published - May 5, 2026 | 10:22 PM IST

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