डॉलर के मुकाबले रुपया आज कारोबार के दौरान लुढ़ककर 94.85 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर आ गया और सरकारी बॉन्ड यील्ड लगभग दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश निकाले जाने से रुपये पर दबाव बढ़ा है।
कारोबार की समाप्ति पर रुपया 94.81 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर बंद हुआ। पिछले बंद भाव की तुलना में इसमें लगभग 0.9 फीसदी की गिरावट आई जिससे यह एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया।
डीलरों ने कहा कि रुपया 95 के मनोवैज्ञानिक रूप से महत्त्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंच रहा है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) डॉलर की बिक्री के जरिये विदेशी मुद्रा बाजार में बीच-बीच में दखल दे रहा है।
डीलरों का कहना है कि केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से फॉरवर्ड (अग्रिम) बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है न कि हाजिर बाजार में। इससे रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए फॉरवर्ड बाजार पर बढ़ती निर्भरता रुपये की मध्यम अवधि की दिशा को प्रभावित करने लगी है। बाजार जानकारों के अनुमान के मुताबिक करीब 100 अरब डॉलर की भारी शुद्ध शॉर्ट डॉलर पोजीशन बनाकर केंद्रीय बैंक मूल्यह्रास के दबाव को खत्म करने के बजाय उसे टाल रहा है।
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शिन्हान बैंक इंडिया के ग्लोबल ट्रेडिंग सेंटर, फॉरेक्स एवं रेट्स ट्रेजरी के प्रमुख कुणाल सोधनी ने कहा, ‘ऐसे हस्तक्षेप तत्काल डॉलर की मांग को कम करके और विदेशी मुद्रा भंडार को बनाए रखकर अल्पावधि में रुपये को स्थिर करने में मदद करते हैं मगर भविष्य में अतिरिक्त बोझ पैदा करते हैं क्योंकि ऐसे अनुबंध के परिपक्व होने पर डिलीवरी करनी होती है या आगे बढ़ाना होता है।’
20 मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 11.4 अरब डॉलर घटकर 698.3 अरब डॉलर हो गया। यह गिरावट मुख्य रूप से सोने के भंडार में 13.5 अरब डॉलर की कमी के कारण हुई जबकि विदेशी मुद्रा संपत्ति में 2.1 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। इसी सप्ताह रुपये में 1.23 फीसदी की गिरावट आई है।
सोधनी ने कहा, ‘इसने पहले ही बढ़े हुए फॉरवर्ड प्रीमियम और स्वैप बाजारों में तरलता की तंग स्थिति पैदा कर दी है जो अंतर्निहित डॉलर की मांग का संकेत देता है।’
पश्चिम एशिया संकट के शुरू होने के बाद से रुपये में 4 फीसदी से अधिक की गिरावट आ चुकी है और इस तिमाही में रुपया 5.2 फीसदी गिरा है। डॉलर के मुकाबले रुपया वित्त वर्ष 2026 में 9.85 लुढ़का है। रुपये के प्रदर्शन के लिहाज से यह वित्त वर्ष 2012 के बाद से सबसे खराब साल हो सकता है। 2012 में रुपया 12.37 फीसदी गिरा था।
बाजार के भागीदारों का कहना है कि अगर कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, डॉलर में मजबूती और विदेशी बिकवाली जारी रहती है तो रुपया 94 प्रति डॉलर को छू सकता है। दूसरी ओर बेंचमार्क 10 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 6.95 फीसदी पहुंच गई। ईंधन पर उत्पाद शुल्क कटौती ने राजकोषीय घाटे के बारे में चिंता बढ़ा दी जिसका असर बॉन्ड यील्ड पर पड़ा।
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ब्रेंट क्रूड की कीमत पिछले दिन के 99.31 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में बढ़कर 109.75 डॉलर प्रति बैरल हो गई। डॉलर इंडेक्स पिछले दिन के 99.31 की तुलना में बढ़कर 100 हो गया।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से केंद्र को 12 महीनों में ईंधन निर्यात पर उच्च करों से होने वाले लाभ को ध्यान में रखते हुए 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का शुद्ध राजस्व घाटा होने का अनुमान है।