डीलरों ने बताया कि मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण रुपया कमजोर हुआ और सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी आई। रुपया 0.38 प्रतिशत गिरकर 94.55 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि एक दिन पहले यह 94.19 प्रति डॉलर पर था। कारोबारियों ने बताया कि सरकारी बैंकों ने संभवतः भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से डॉलर खरीदे, जिससे रुपये को और गिरने से बचाया जा सका।
चालू कैलेंडर वर्ष में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में अब तक 4.94 प्रतिशत की कमजोरी आई है। लेकिन चालू वित्त वर्ष में इसमें अब तक 0.28 प्रतिशत की मजबूती देखी गई है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी में ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘कच्चे तेल की कीमतें 111 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। ऐसे में तेल आयात के लिए डॉलर की मांग ज्यादा रहने की उम्मीद है। तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपया संवेदनशील नजर आ रहा है। एफपीआई और दूसरे स्रोतों से लगातार होती निकासी से भी इस मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।’
कच्चे तेल की कीमतों में 2.62 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 111.07 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स 0.25 प्रतिशत बढ़कर 98.73 पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स छह प्रमुख मुद्राओं के समूह के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापता है।
मंगलवार को एशियाई व्यापार में तेल की कीमतों में वृद्धि देखी गई, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध कम होने के संकेत नहीं दिख रहे थे। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने तेहरान के होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे अल्पावधि में महत्त्वपूर्ण शिपिंग मार्ग काफी हद तक बंद है। इस बीच, बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल 4 आधार अंक बढ़कर 6.98 प्रतिशत पर आ गया, जो एक दिन पहले 6.94 प्रतिशत के स्तर पर था।