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Soybean meal import: सोया उद्योग की सरकार से जीएम सोया खली आयात की अनुमति न देने की अपील

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Soybean meal import: पोल्ट्री उद्योग कर रहा है जीएम सोया खली के आयात की मांग

Last Updated- February 05, 2026 | 7:22 PM IST
soyabean meal imports

Soybean meal import: देश में आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) सोयाबीन खली के आयात की मांग को लेकर विवाद हो गया है। सोयाबीन प्रोसेसिंग उद्योग सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने सरकार से आयात की अनुमति न देने की अपील की है। सोपा का कहना है कि देश में सोयाबीन की पर्याप्त उपलब्धता होने के बावजूद आयात की अनुमति देना किसानों के हितों के खिलाफ होगा और कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाएगा।

सोपा ने लिखा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री को पत्र

सोपा ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर जीएम सोया खली के आयात को अनुमति न देने का आग्रह किया है। सोपा द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है, “हमें जानकारी मिली है कि पोल्ट्री उद्योग जीएम सोयाबीन खली के आयात की अनुमति की मांग कर रहा है। भारत के सोयाबीन किसानों और प्रोसेसिंग उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले हितधारकों की ओर से हम इस मांग को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करना चाहते हैं, जिसे घरेलू स्तर पर उत्पादित सोयाबीन खली की ऊंची कीमत के आधार पर उचित ठहराया जा रहा है। हम सरकार से इस मांग को अस्वीकार करने का आग्रह करते हैं। जब घरेलू आपूर्ति पर्याप्त है, तब आयात की अनुमति देना लाखों किसानों और हमारे कृषि क्षेत्र की दीर्घकालिक बुनियाद के लिए हानिकारक होगा।”

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सोपा ने बताया क्यों न दी जाए आयात की अनुमति?

सोपा ने केंद्रीय मंत्री गोयल को लिखे पत्र में कहा कि हमारा निवेदन तथ्यों पर आधारित है। मूल्य निर्धारण बाजार आधारित है, यह उद्योग नियंत्रित नहीं है। सोयाबीन खली के उत्पादन लागत का लगभग 96 फीसदी हिस्सा सोयाबीन की कीमत होती है। इस लागत पर प्रोसेसिंग उद्योग का कोई नियंत्रण नहीं है। सोयाबीन खली की कीमतें सोयाबीन तेल की प्राप्ति (रियलाइजेशन) से भी प्रभावित होती हैं। चूंकि घरेलू तेल कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर हैं, इसलिए उनका सीधा असर खली की कीमतों पर पड़ता है।

चालू तेल वर्ष के दौरान देश में करीब 77.20 लाख टन सोयाबीन खली की उपलब्धता रहने का अनुमान है, जबकि पशु चारे में खपत करीब 60 लाख टन ही है। 8 लाख टन निर्यात और इतनी इसकी खाद्य खपत को निकालकर भी 1.22 लाख टन कैरीओवर स्टॉक शेष रह सकता है। सोपा ने पत्र में सरकार से कहा कि ऐसे में हम आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि देश के किसानों, कृषि अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए जीएम सोयाबीन खली के आयात की अनुमति न दी जाए।

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First Published - February 5, 2026 | 7:22 PM IST

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