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महाराष्ट्र में प्याज मुद्दे पर बनाई गई सब कमेटी, 15 दिनों के अंदर सुझावों के साथ जमा करेंगी रिपोर्ट

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यह समिति प्याज की कीमतों में गिरावट के कारणों का अध्ययन करेगी और राज्य के प्याज क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुझाव देगी

Last Updated- June 10, 2026 | 7:41 PM IST
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महाराष्ट्र में प्याज का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। किसानों को प्याज का लागत भाव भी नहीं मिल रहा है जिसके कारण उनमें नाराजगी है। किसानों की नाराजगी को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र सरकार ने प्याज से जुड़े विभिन्न मुद्दे के अध्ययन के लिए के सचिव स्तर की एक उप समिति का गठन किया है। यह समिति प्याज की कीमतों में गिरावट के कारणों का अध्ययन करेगी और राज्य के प्याज क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुझाव देगी।

समिति पिछले 7-8 वर्षों की केंद्र सरकार की प्याज निर्यात नीति के प्रभाव की भी समीक्षा करेगी। इसके अलावा बेहतर प्याज किस्मों को बढ़ावा देने, भंडारण व्यवस्था, प्याज से बनने वाले उत्पादों और मूल्य श्रृंखला में सुधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी। समिति को अपनी सिफारिशों सहित रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार को सौंपनी होगी। सहकारिता एवं विपणन विभाग ने इस बारे में एक सरकारी निर्देश जारी किया है।

क्यों किया गया सब-कमेटी का गठन?

प्याज के संबंध में व्यापक जरूरी और लंबे समय के उपाय सुझाने के लिए 23 अप्रैल, 2026 के सरकारी फैसले के तहत फाइनेंस डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी गई। इस कमेटी के सदस्य कोऑपरेशन, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी और एग्रीकल्चर कमिश्नर हैं। स्टेट एग्रीकल्चर एंड मार्केटिंग बोर्ड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कमेटी के सदस्य सेक्रेटरी हैं।

कमेटी को प्याज की फसल के संबंध में किए जाने वाले लंबे समय के उपायों का सुझाव देना था। इस कमेटी के लिए अपनी रिपोर्ट जमा करने की कोई समय सीमा तय नहीं की गई थी। इसीलिए अब समय पर रिपोर्ट जमा करने के लिए एक सब-कमेटी का गठन किया गया है। यह उप-समिति सहकारिता विभाग की मुख्य समिति के अंदर काम करेगी। इसमें डॉ. किसानराव लांडे, सुनील पवार, सारंग निर्मल, नरेंद्र पवार और शरद जारे जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं।

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सब-कमेटी के काम की शर्तें

कमेटी को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह कृषि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार अच्छी क्वालिटी के प्याज को वैल्यू चेन में कैसे लाया जाए, हाई टेम्परेचर स्टोरेज की डिटेल्स, इसके फायदे और कॉस्ट स्ट्रक्चर, प्रोडक्शन कॉस्ट पर असर, और प्याज स्टोरेज सेंटर्स पर जाकर रिपोर्टिंग करे। यह समिति प्याज की कीमत गिरने के कारणों की जांच करेगी, पिछले 7-8 सालों में केंद्र सरकार की निर्यात नीति का असर देखेगी, प्याज की अच्छी किस्मों, भंडारण, उप-उत्पाद और कीमत श्रृंखला को बेहतर बनाने के उपाय सुझाएगी। उप-समिति को 15 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को देनी होंगी।

किसानों को नहीं मिल रहा उचित मूल्य

महाराष्ट्र के प्रमुख प्याज उत्पादक जिलों में किसानों के हाल बेहाल हैं। किसानों को कई बार लागत से बहुत कम दाम में अपनी प्याज बेचनी पड़ी है। किसानों की समस्या को लेकर NAFED और NCCF को एक-एक लाख टन प्याज सीधे किसानों से खरीदने की बात कही गई थी। जिसके लिए सरकार ने पहले 1,235 रुपये प्रति क्विंटल प्याज की कीमत तय की लेकिन किसानों के विरोध के बाद प्याज की खरीद कीमत बढ़कर 1,580 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई।

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संघ के अध्यक्ष भारत दिघोल के मुताबिक किसानों को मंडी में उचित भाव नहीं मिल रहा है और ना ही सहकारी समितियां भाव बढ़ाने को तैयार हैं, ऐसे में किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य की मंडियों में ए ग्रेड प्याज की कीमत 1500-2000 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन प्याज उगाने का खर्च करीब 2,200 रुपये प्रति क्विंटल आता है। संघ की मांग है कि प्याज की कीमत कम से कम 3000 रुपये प्रति क्विंटल की जाए।

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First Published - June 10, 2026 | 7:40 PM IST

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