facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

टमाटर 3-4 रुपये किलो? जानें टमाटर किसानों के हालात

Advertisement

टमाटर का भाव तीन से चार रुपये प्रति किलो तक गिर गया है, जबकि खेती पर लागत लगभग 14-15 रुपये प्रति किलो आ रही है।

Last Updated- May 29, 2025 | 4:35 PM IST
Tomato
बिजनेस स्टैंडर्ड हिन्दी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में टमाटर किसानों की हालत बहुत खराब है। इस साल टमाटर की अच्छी पैदावार के बावजूद बाजार में कीमतों में भारी गिरावट से किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि टमाटर का भाव तीन से चार रुपये प्रति किलो तक गिर गया है, जबकि खेती पर लागत लगभग 14-15 रुपये प्रति किलो आ रही है।

किसान बताते हैं कि कई बार कीटनाशक लगाने के बावजूद खेतों में ‘सुंडी’ नामक रोग नहीं जा रहा है, जिससे फसल भी खराब हो रही है। मुरादाबाद के टमाटर किसान हरि ओम ने बताया कि उन्होंने 50 बीघे में टमाटर की खेती की, जिसमें छह-सात लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन उन्हें मात्र एक-दो लाख रुपये का ही लाभ मिल रहा है।

ALSO READ: प्याज 1 रुपये किलो? पढ़ें MP की नीमच सब्जी मंडी से ग्राउंड रिपोर्ट

दूसरे किसान इंतेज़ार अहमद ने 10 एकड़ टमाटर की खेती बताई, जिनमें उन्हें लगभग 15-16 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि लगातार तीन वर्षों से टमाटर की फसल में नुकसान हो रहा है, जिसकी वजह मंदी और बाजारों तक पहुंच की कमी है।

क्या बता रहे है टमाटर किसान

राम स्वरूप ने बताया कि टमाटर की मंडियां ठप पड़ी हैं, बाहर लोडिंग बंद है और गर्मी के कारण फल भी ठीक से नहीं बन पा रहे। उनका कहना है कि टमाटर की खेती में प्रति बीघा 10,000 से 12,000 रुपये का खर्चा आता है, लेकिन लागत भी वापस नहीं मिल रही है।

सत्यपाल सिंह सैनी ने बताया कि किसान का जो खर्चा हुआ है, वह भी पूरा नहीं हो पा रहा है क्योंकि टमाटर की मांग मंदा है और बाहर लोडिंग नहीं हो पा रही।

किसान उम्मीद लगाए हुए हैं कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा करे, जिससे वे अपनी लागत वसूल सकें और फसल को नुकसान से बचा सकें। फिलहाल, बाजार में टमाटर की गुणवत्ता के आधार पर ही व्यापारी टमाटर खरीद रहे हैं, जिससे कई फसलें खराब हो रही हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ) 

Cabinet Decisions: खरीद फसलों के लिए MSP का ऐलान, धान की कीमत में ₹69 प्रति ​क्विंटल इजाफा

मॉनसून मेहरबान: इस साल जमकर बरसेंगे बादल

समय से पहले बारिश से प्याज की कीमतों में आग, मंडियों में घटी आवक; एक हफ्ते में ₹300 क्विंटल तक बढ़े दाम

Advertisement
First Published - May 29, 2025 | 4:21 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement