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वनस्पति तेल आयात 6% बढ़ा, लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष से सप्लाई चेन पर मंडराया खतरा

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चालू तेल वर्ष के पहले 4 माह के दौरान वनस्पति तेलों के आयात में सालाना आधार पर 6 और मासिक आधार पर 35% इजाफा हुआ, लेकिन आगे पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात हो सकता है बाधित।

Last Updated- March 18, 2026 | 8:36 PM IST
Vegetable Oil Import

तेल वर्ष 2025-26 (नवंबर से अक्टूबर) में वनस्पति तेल आयात में तेजी देखने को मिल रही है। इस तेल वर्ष के पहले 4 महीने के दौरान वनस्पति तेल आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फरवरी महीने में सालाना आधार पर वनस्पति तेल आयात में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि मासिक आधार पर गिरावट आई है। भारत सरकार की नीतियों के कारण रिफाइंड तेलों के आयात में कमी आई है। लेकिन कच्चे तेलों का आयात बढ़ा है। हालांकि पश्चिम एशिया संकट के कारण आगे खाद्य तेल खासकर सूरजमुखी का आयात प्रभावित हो सकता है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के मुताबिक तेल वर्ष 2025-26 (नवंबर से अक्टूबर) के पहले 4 महीने यानी नवंबर से फरवरी के बीच 53.24 लाख टन वनस्पति तेलों (52.18 लाख टन खाद्य तेल और करीब 1.05 लाख टन गैर खाद्य तेल) का आयात हुआ है, जो पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में 50.23 लाख टन वनस्पति तेलों (48.85 लाख टन खाद्य तेल और 1.38 लाख टनर टन गैर खाद्य तेल) के आयात से 6 फीसदी ज्यादा है। सालाना आधार पर वनस्पति तेलों का आयात फरवरी में 35 फीसदी बढ़कर 13.16 लाख टन हो गया। हालांकि जनवरी की तुलना में इनके आयात में हल्की गिरावट देखने को मिली। जनवरी के 13.39 लाख टन के मुकाबले फरवरी में यह घटकर 13.16 लाख टन रह गया।

रिफाइंड तेल आयात घटा, कच्चे तेलों का बढ़ा

सरकारी नीतियों यानी कच्चे व रिफाइंड तेलों के बीच आयात शुल्क के अंतर को बढ़ाने के कारण रिफाइंड यानी आरबीडी पामोलीन का आयात घट रहा है। सरकार ने पिछले साल एक मई से दोनों के बीच आयात शुल्क का अंतर 8.25 फीसदी से बढ़ाकर 19.25 फीसदी कर दिया था । चालू तेल वर्ष की नवंबर-फरवरी अवधि के दौरान महज 1.18 लाख टन रिफाइंड तेल का आयात हुआ, जबकि पिछले तेल वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 8 लाख टन था। फरवरी में 10,649 टन ही रिफाइंड तेलों का आयात हुआ।

रिफाइंड तेलों के उलट कच्चे तेल के आयात में तेज इजाफा हुआ है। चालू तेल वर्ष के पहले 4 माह के दौरान 50.99 लाख टन कच्चे तेलों का आयात हुआ, जो पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में आयात हुए 40.81 लाख टन कच्चे तेलों की तुलना में करीब 25 फीसदी अधिक है। चालू तेल वर्ष के पहले 4 माह में पाम तेलों का आयात सालाना आधार पर करीब 38 फीसदी बढ़कर 27.57 लाख टन हो गया। फरवरी में इनका आयात जनवरी के 7.66 लाख टन की तुलना में बढ़कर 8.47 लाख टन हो गया।

सोया व सूरजमुखी तेल के आयात में आई गिरावट

पिछले तेल वर्ष के दौरान कच्चे सोया तेल के आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। लेकिन चालू तेल वर्ष में इसके आयात में भी कमी देखने को मिली। चालू तेल वर्ष के पहले 4 माह के दौरान कच्चे सोया तेल का आयात सालाना आधार करीब 11 फीसदी गिरकर 15.43 लाख टन रह गया। इसी तरह कच्चे सूरजमुखी तेल का आयात सालाना आधार पर पहले 4 माह में 20 फीसदी से ज्यादा घटकर 9.11 लाख टन रह गया। मासिक आधार पर कच्चे सोया तेल का आयात करीब एक फीसदी बढ़कर 2.99 लाख हो गया, जबकि कच्चे सूरजमुखी तेल का आयात करीब 45.50 फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ 1.45 लाख टन रह गया।

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पश्चिम एशिया संकट की पड़ सकती है खाद्य तेल आयात पर मार

एसईए का कहना है कि हाल ही में मध्य पूर्व में हो रहे संघर्षों से आपूर्ति शृंखला में रुकावटों की वजह से भारत के खाद्य तेल बाजार में बड़ी अस्थिरता आ गई है। भारत सूरजमुखी तेल के लिए मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन पर निर्भर है, लेकिन वर्तमान संघर्ष खासकर स्वेज नहर और लाल सागर में आपूर्ति संकट तेल की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है और परिवहन लागत बढ़ा सकता है। कच्चे तेल की कीमतों के बढ़ने से मध्य पूर्व में पाम तेल से बने बायो डीजल की मांग बढ़ रही है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया में पाम तेल की कीमतें बढ़ सकती है।

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First Published - March 18, 2026 | 8:30 PM IST

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