भारत में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) पेशेवरों को नौकरी पर रखने की दर पिछले वर्ष की तुलना में 59.5 प्रतिशत बढ़ी है। इसका बड़ा कारण विभिन्न उद्योगों और कंपनियों में तेजी से एआई को अपनाया जाना है। लिंक्डइन की नई एआई लेबर मार्केट रिपोर्ट-2026 के अनुसार सभी छोटे-बड़े उद्योगों, संगठनों और कंपनियों में एआई की मदद से काम किया जा रहा है, जिससे इसमें पारंगत इंजीनियरों की मांग बढ़ रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बेंगलूरु वैश्विक एआई हब के रूप में अग्रणी बना हुआ है। वहीं हैदराबाद में एआई पेशेवरों की भर्ती में 51% और विजयवाड़ा 45.5% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थिति छोटे और मझोले बाजारों में एआई क्षेत्र में बढ़ते व्यापक अवसरों की ओर संकेत कर रही है। लिंक्डइन इंडिया इंजीनियरिंग के प्रमुख मलय लक्ष्मणन ने कहा, ‘हम एआई एजेंट्स और प्रोडक्टिविटी टूल्स जैसे एप्लाइड एआई कौशल वाले क्षेत्रों में तेज वृद्धि देख रहे हैं। ये सीधे तौर पर वास्तविक दुनिया में उनके उपयोग से जुड़े हुए हैं।’
उन्होंने यह भी कहा, ‘इंजीनियरों को अब स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि उन्हें व्यावहारिक, क्षमता विकास के साथ-साथ एआई को रोजमर्रा के कामकाज में इस्तेमाल करने पर ध्यान केंद्रित करें। जैसे-जैसे सभी उद्योगों और संगठनों में एआई अपनाने की गति बढ़ रही है, इसे भांपते हुए जो पेशेवर या कंपनियां अपने कामकाम में इसके प्रयोग से लेकर कार्यान्वयन तक जितनी जल्दी तालमेल बैठा लेंगे, वे इसका उतना ही अधिक लाभ उठा पाएंगे।’
बड़ी कंपनियां व्यापक स्तर पर एआई पेशेवरों अपने साथ जोड़ रही हैं और इसके लिए वे अपने बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यान्वयन के लिए मोटा निवेश कर रही हैं। इसके साथ ही छोटी और मध्यम स्तर की कंपनियां भी एआई अपनाने में पीछे नहीं हैं, जो इसके प्रारंभिक प्रयोग और उद्यम-स्तर पर इसे लागू करने में मददगार साबित हो रही हैं।
जिस तरह देश भर में कंपनियां या क्षेत्र एआई को लागू कर रहे हैं, उसके मद्देनजर विभिन्न उद्योगों में एआई कौशल वाले पेशेवरों की भर्तियां भी बढ़ रही हैं। विनिर्माण क्षेत्र में एआई इंजीनियरिंग पेशेवर 2025 में 4 गुना बढ़ गए हैं और इनकी संख्या कुल कार्यबल में 2 प्रतिशत तक पहुंच गई है रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एआई को अक्सर नौकरियों, विशेष रूप से शुरुआती भूमिकाओं को समाप्त करने के रूप में देखा जाता है, लेकिन भर्ती के आंकड़े जो अलग तस्वीर पेश करते हैं जिसे व्यापक आर्थिक अनिश्चितता से जोड़ कर देखा जा रहा है।
ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और भारत में शुरुआती स्तर के पदों पर भर्ती में समग्र भर्ती की तुलना में लगभग समान रूप से गिरावट आई है। इसमें कोई ऐसा संकेत सामने नहीं आया कि एआई की वजह से शुरुआती स्तर की नौकरियों में असाधारण रूप से कमी आई हो।