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HFCL का मास्टर प्लान: डेटा सेंटर और रक्षा क्षेत्र में करेगी ₹900 करोड़ का बड़ा निवेश, बदल जाएगी कंपनी

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डेटा सेंटरों की मांग और रक्षा क्षेत्र में बढ़ते अवसरों को देखते हुए एचएफसीएल ₹900 करोड़ के निवेश के साथ अपनी विनिर्माण क्षमता और स्वदेशी तकनीक का विस्तार कर रही है

Last Updated- March 29, 2026 | 11:00 PM IST
Mahendra Nahata
HFCL के संस्थापक और प्रबंध निदेशक महेंद्र नाहटा | फोटो क्रेडिट: HFCL

फाइबर ऑप्टिक, फाइबर ऑप्टिक केबल और दूरसंचार उपकरण विनिर्माण क्षेत्र की घरेलू कंपनी एचएफसीएल अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही है। इसके लिए वह नए संयंत्रों में प्रवर्तकों की इक्विटी का 800 से 900 करोड़ रुपये निवेश कर रही है। भारत में वैश्विक हाइपरस्केलर्स द्वारा डेटा सेंटरों में किए जा रहे अरबों डॉलर के निवेश की प्रत्याशित मांग के मद्देनजर ऐसा किया जा रहा है।

संस्थापक और प्रबंध निदेशक महेंद्र नाहटा ने गुलवीन औलख को बताया कि कंपनी के पास 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर हैं और वह अ​धिक मूल्य वाले अनुबंध करने में लगी है। साथ ही साथ वह सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी उपकरणों के विनिर्माण के साथ विविधता ला रही है। इससे उसकी रक्षा सहायक कंपनी विकास में मददगार बनेगी। संपादित अंश

रक्षा और एरोस्पेस के लिए अलग कंपनी बनाने के पीछे बड़ी योजना क्या है?

हमने सोचा था कि हमें उपकरण या ग्राहक के मद्देनजर दूरसंचार क्षेत्र से संबंधित क्षेत्रों में विविधता लानी चाहिए। रक्षा क्षेत्र स्वाभाविक पसंद बन गया। इसलिए कि हमने ‘नेटवर्क फॉर स्पेक्ट्रम’ (साल 2018 में शुरू किया गया भारतीय सेना और वायु सेना के लिए सुरक्षित और अखिल भारतीय संचार नेटवर्क) नामक बड़ी नेटवर्क परियोजना पर काम किया था। हमने शुरू में इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद निर्मित किए थे। लेकिन अब हमारे पास कुछ गैर-इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद हैं।

इनमें ग्राउंड और कोस्टल सर्विलांस रडार सहित हमारी अपनी अहम उपयोग वाली प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। फोएलिज पेनेट्रेशन रडार बनाने वाली हम एकमात्र भारतीय कंपनी हैं। हमने तोपखाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज बनाए हैं, जिनका वर्तमान में परीक्षण किया जा रहा है। हम गोले बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। हमने ड्रोन डिटेक्शन रडार विकसित किया है, जिसका फील्ड परीक्षण किया जा रहा है। बाहरी क्षमता विस्तार के लिहाज से भी हमने स्पाइरल ईएचएल इंजीनियरिंग का अधिग्रहण किया है।

इसलिए हमने सोचा कि यह सहायक कंपनी – एचएफसीएल एडवांस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड में करें, जो विशेष रूप से रक्षा पर ध्यान केंद्रित करती है। हमारे पास 1,700 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक है और हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में और अधिक ऑर्डर मिलेंगे।

आगे चलकर दूरसंचार और रक्षा के बीच विकास का मुख्य इंजन कौन होगा?

हम दोनों में ही वृद्धि देखेंगे। पिछले साल तक फाइबर ऑप्टिक केबल की मांग काफी कम थी। लेकिन हमने डेटा सेंटरों के आने का अनुमान लगाया था। इसलिए हमने क्षमता बढ़ाई, जिससे आज बेहतर राजस्व मिला। लेकिन हम मांग में होने वाली इतनी भारी बढ़ोतरी का अंदाजा भी नहीं लगा पाए थे, यहां तक कि 1 अरब डॉलर का ऑर्डर मिलने के बावजूद भी।

इस नए ऑर्डर को पूरा करने के लिए क्या आपको अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता होगी?

फाइबर विनिर्माण के लिए हमारे पास प्रति वर्ष तीन करोड़ किलोमीटर की फाइबर (क्षमता) है। इसे अब लगभग 3.6 करोड़ तक बढ़ाया जा रहा है। हम इसे और 60 लाख तक बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इससे यह चार करोड़ से अधिक हो जाएगी। हम और आईआईटी दिल्ली मिलकर होलो कोर फाइबर विकसित कर रहे हैं। यह लेटेंसी कम करने में सक्षम होगा, जो डेटा सेंटरों में इस्तेमाल होता है। हम मल्टी-कोर फाइबर भी विकसित कर रहे हैं। फाइबर ऑप्टिक केबल के लिए हमारे पास प्रति वर्ष लगभग 4.5 करोड़ किलोमीटर र की क्षमता है।

हम अब बैकवर्डली इंटिग्रेटेड हैं और हमने पिछले सप्ताह घोषणा की कि हम प्रीफॉर्म के विनिर्माण के साथ और अधिक एकीकृत हो रहे हैं। प्री फॉर्म बुनियादी कच्चा माल होता है जिसके लिए हमें हर साल 1,200 टन से अधिक की आवश्यकता होगी। इसलिए हम 300 टन की प्रारंभिक क्षमता बना रहे हैं। इस पर हम प्रवर्तकों को जारी किए गए वारंट के जरिये 580 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।

अगले दो से तीन वर्षों के दौरान दोनों कंपनियों के लिए पूंजीगत व्यय कितना होगा?

प्रीफॉर्म परियोजना के लिए यह लगभग 580 करोड़ रुपये तथा रक्षा और फाइबर ऑप्टिक विस्तार के लिए 300 से 400 करोड़ रुपये होगा।

पश्चिम एशिया संघर्ष का कारोबार पर कितना असर पड़ा है?

पश्चिम एशिया ने हमें विशेष तरीके से प्रभावित किया है। फाइबर विनिर्माण के कच्चे माल में शामिल पीबीटी (पॉलीब्यूटिलीन टेरेफ्थेलेट) का आयात किया जाता है। इसलिए जब तक यह (संघर्ष) जल्द समाप्त नहीं हो जाता, हमें पश्चिम एशिया से आयात बंद करना होगा और अन्य देशों से आयात करना होगा जिसके दाम अ​धिक हो सकते हैं। जहां तक विदेशी मुद्रा की अस्थिरता की बात है, तो हम कुछ हद तक सकारात्मक फायदे की दिशा में हैं, क्योंकि वर्तमान में हमारा फाइबर ऑप्टिक केबल 80 प्रतिशत से अधिक निर्यात होता है। दूरसंचार उपकरण के संबंध में हम कुछ घाटे में हैं क्योंकि हमारे सभी पुर्जे आयात किए जाते हैं, जिसमें बेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड भी शामिल हैं।

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First Published - March 29, 2026 | 11:00 PM IST

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