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IT सेक्टर को मिली बड़ी राहत: भारत-अमेरिका ट्रेड डील से खत्म हुई अनिश्चितता, शेयरों में जबरदस्त तेजी

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उद्योग के विश्लेषकों का कहना है कि इस समझौते से यह डर कम हो गया है कि आईटी सेवाओं को एक व्यापक व्यापार संघर्ष में घसीटा जा सकता है

Last Updated- February 03, 2026 | 10:48 PM IST
IT Sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिका-भारत व्यापार समझौते ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग को राहत दी है, जो पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में व्यापक अनिश्चितता और ग्राहकों के कम खर्च की चुनौतियों से जूझ रहा था।

उद्योग के विश्लेषकों का कहना है कि इस समझौते से यह डर कम हो गया है कि आईटी सेवाओं को एक व्यापक व्यापार संघर्ष में घसीटा जा सकता है। साथ ही यह भी साफ हो गया है कि देश के बाहर डिलीवरी का यह मॉडल बरकरार है।

नेल्सनहॉल में प्रमुख शोध विश्लेषक गौरव परब ने कहा कि टैरिफ घोषणाओं के बाद से अमेरिकी प्रशासन ने सौदेबाजी के कई तरीके अपनाए थे, जवाब में व्यापारिक साझेदारों ने भी अपने उपाय किए। इससे यह अनिश्चितता बनी रही कि आखिरकार कौन सा तरीका इस्तेमाल किया जा सकता है।

परब ने कहा, ‘यह समझौता संकेत देता है कि आईटी सेवाओं को, कम से कम अभी के लिए टैरिफ के घेरे में नहीं लाया जा रहा है और देश से बाहर इनका डिलीवरी मॉडल बरकरार है। इस स्पष्टता ने बाजार को बहुत जरूरी राहत दी है, जो उसकी तत्काल सकारात्मक प्रतिक्रिया से जाहिर है।’

कई लोगों की यह भी राय थी कि इससे भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के सबसे बड़े बाजार अमेरिका में क्लाइंटों को अपने निर्णय चक्र में सुधार में मदद मिलेगी। टैरिफ की अनिश्चितता और एआई में उछाल के कारण बड़े सौदे हासिल करने में देर हो रही थी।

 इसका असर मंगलवार को शेयर बाजारों में भी दिखा। समझौते की घोषणा के एक दिन बाद आईटी शेयरों में तेज वृद्धि हुई क्योंकि निवेशकों ने इस क्षेत्र में सुधार की संभावना पर दांव लगाया। मिड-कैप कंपनियों ने लार्ज कैप कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन किया क्योंकि अमेरिकी बाजार में उनका कारोबार अधिक है। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में एक दिन के कारोबारी सत्र के दौरान 8 प्रतिशत की सबसे अधिक बढ़त हुई जबकि हेक्सावेयर और एलटीआईमाइंडट्री में 4.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। टीसीएस के शेयर 5.2 प्रतिशत और विप्रो के शेयर 7.4 प्रतिशत तक चढ़े।

नैसकॉम ने एक बयान में कहा, ‘यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करता है और तकनीक से जुड़ी वृद्धि के लिए अधिक स्थिर माहौल बनाने में मदद करेगा।’

यह सेक्टर कई तिमाहियों से भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची महंगाई और कम तकनीकी खर्च के कारण दबाव में रहा है, जिससे उसकी राजस्व वृद्धि और मार्जिन पर असर पड़ा है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उभार ने काम और सौदों के स्वरूप बदल दिए हैं। अब क्लाइंट मौजूदा बजट के भीतर अधिक काम और बेहतर क्षमता की मांग कर रहे हैं। साथ ही यह उम्मीद भी कि एआई से जुड़े फायदे उन तक पहुंचाए जाएं।  

बीएनपी परिबा को उम्मीद है कि आईटी सेवाओं सहित प्रमुख क्षेत्र में भारतीय कमाई की वृद्धि में सुधार होगा। बीएनपी परिबा में भारत इक्विटी रिसर्च के प्रमुख कुणाल वोरा ने एक नोट में लिखा, ‘जनवरी 2026 में भारत ने अपने दो सबसे बड़े निर्यात बाजारों, यूरोपीय संघ और अमेरिका दोनों के साथ व्यापार समझौते किए। हमें उम्मीद है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) वाले वित्तीय और आईटी सेवा क्षेत्र को एफपीआई की वापसी से फायदा होगा।’

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First Published - February 3, 2026 | 10:48 PM IST

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