facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

एनवीडिया-ओरेकल जैसी सफलता पाने को भारतीय IT कंपनियों को बदलना होगा कलेवर और तेवर

Advertisement

विशेषज्ञों ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियां एआई और आरएंडडी में पूंजी निवेश कर नवाचार अपनाएं, तभी वे एक्सेंचर जैसी रणनीति से बेहतर मूल्यांकन और वैश्विक सफलता हासिल कर पाएंगी

Last Updated- September 14, 2025 | 9:43 PM IST
IT Company
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

दीवार पर लिखी इबारत साफ है – अगर भारतीय कंपनियां एनवीडिया या ओरेकल जैसी कामयाबी पाना चाहती हैं, तो उन्हें नई रणनीति अपनानी होगी यानी शेयर के दामों में ऐसी आश्चर्यजनक उछाल जो कंपनियों को अलग मुकाम पर पहुंचा दे जहां से पीछे मुड़कर देखने की जरूरत न रहे। ओरेकल के नवोदय से पता चलता है कि जब कोई कंपनी तकनीकी बदलाव के संबंध में खुद को नए सिरे से ढालने के लिए पूंजी लगाती है, तो क्या हो सकता है।

एचएफएस रिसर्च के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी फिल फर्श्ट ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘भारतीय आईटी कंपनियां यह सीख सकती हैं कि शेयरधारकों का मूल्य निरंतर नवाचार और बाजार की अगुआई से आता है, केवल मार्जिन बरकरार रखने से नहीं। लाभांश बांटने वाले बैंक की तरह व्यवहार न करें, बल्कि भविष्य को आकार देने वाली तकनीकी कंपनी की तरह व्यवहार करें।’

चूंकि एआई कारोबार के नियमों को बदल रही है, इसलिए भारतीय आईटी सेवा क्षेत्र की कंपनियों को लेकर आलोचना बढ़ रही है। विश्लेषकों और उद्योग विशेषज्ञों ने अनुसंधान एवं विकास (आरऐंडडी) में और अधिक पूंजी निवेश करने तथा एआई-आधारित और अधिक अनुप्रयोगों के निर्माण की आवश्यकता बताई है ताकि वे प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों के रूप में अपनी स्थिति फिर से जमा सकें क्योंकि एआई, जेन एआई और एजेंटिक एआई के प्रभाव के कारण उनके नीचे की जमीन हिल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि ये कंपनियां, चाहे वे बड़ी हों या मझोली, खर्च के लिए अपने पास रखी ढेर सारी नकदी को अधिक एआई-संचालित समाधानों तथा अनुप्रयोग बनाने पर लगाएं या लक्ष्यबद्ध अधिग्रहणों के साथ वृद्धि करें। यह कुछ ऐसा है, जो इस क्षेत्र की अग्रणी एक्सेंचर की पहचान रही है।

फर्श्ट ने कहा, ‘एक्सेंचर ने अनुसंधान एवं विकास में अपने अनवरत पुनर्निवेश, निरंतर क्षमता निर्माण और अपने खुद के वितरण मॉडल में बदलाव की चाह के साथ रणनीति तैयार की है। उसने पुनर्खरीद पर निर्भर रहने के बजाय उद्योग में गहरी प्रासंगिकता बनाए रखने और आईपी निर्माण पर ध्यान दिया है।’

कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार एक्सेंचर ने अगस्त 2024 को समाप्त अपने वित्त वर्ष के दौरान अनुसंधान एवं विकास पर 1.2 अरब डॉलर खर्च किए। इस निवेश ने एआई, डिजिटल परिवर्तन और विभिन्न उद्योगों में ग्राहकों के लिए नई तकनीकों और सेवाओं के विकास जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया। उसने इस साल 10 कंपनियों का अधिग्रहण किया और एआई, शिक्षा तथा कार्यबल प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वह अपने तकरीबन 8,00,000 लोगों के विशाल श्रमबल को नए युग की क्षमताओं के लिहाज से दोबारा कौशल संपन्न और प्रशिक्षित करने का प्रयास कर रही है।

इसके अतिरिक्त ट्रैक्सन के आंकड़ों के अनुसार साल 2019 से 2024 तक प्रति वर्ष अधिग्रहणों की औसत संख्या 33.2 रही। वित्त वर्ष 24 में (अब तक) उसने 5.2 अरब डॉलर की कुल लागत से 35 कंपनियों का अधिग्रहण किया।

Advertisement
First Published - September 14, 2025 | 9:43 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement