वैश्विक स्तर पर आर्थिक माहौल में अनिश्चितता के कारण कंपनियों के लिए अपने बूते स्वाभाविक रूप से वृद्धि करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में भारत की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा कंपनियां इस साल भी अधिग्रहण के जरिये अपना राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। सलाहकार फर्म अनअर्थइनसाइट के आंकड़ों के अनुसार बड़ी और मझोली स्तर की आईटी कंपनियां जनवरी से दिसंबर के बीच करीब 6.5 से 7 अरब डॉलर तक खर्च कर सकती हैं जो पिछले साल के 5 अरब डॉलर से अधिक है। इस दौरान कुल 30-35 करार होने की संभावना है जबकि पिछले साल इसी अवधि में 25 करार हुए थे।
अनअर्थइनसाइट के गौरव वासु संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मुताबिक ज्यादातर अधिग्रहण क्लाउड, डेटा, एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), एजेंटिक एआई और एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में होंगे।
हाल ही में इन्फोसिस ने एक बड़ा अधिग्रहण करते हुए एक अमेरिकी हेल्थकेयर तकनीक परामर्श कंपनी ऑप्टिमम हेल्थकेयर आईटी को 46.5 करोड़ डॉलर में खरीदा है। इसके अलावा कंपनी ने प्रॉपर्टी और कैजुअल्टी बीमा क्षेत्र की तकनीकी कंपनी स्ट्रेटस का अधिग्रहण 9.5 करोड़ डॉलर में किया है।
नोमुरा ने गुरुवार को एक नोट में लिखा कि ये अधिग्रहण वित्त वर्ष 2027 में इन्फोसिस की राजस्व वृद्धि में लगभग 225 आधार अंक का योगदान दे सकते हैं। इन करार से कंपनी को नए ग्राहक मिलेंगे और लाइफ साइंसेज तथा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उसकी क्षमताएं बेहतर होगी।
इन्फोसिस का अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण वर्ष 2024 में हुआ था, जब उसने जर्मनी की इंजीनियरिंग आरऐंडडी कंपनी को करीब 48 करोड़ डॉलर में खरीदा था। इससे पहले वर्ष 2012 में कंपनी ने ज्यूरिख की कंसल्टेंसी फर्म लोडेस्टोन का अधिग्रहण 35 करोड़ डॉलर में किया था।
वित्त वर्ष 2026 में इन्फोसिस ने अधिग्रहण पर कुल 80.8 करोड़ डॉलर खर्च किए। यह हाल के वर्षों में उसका एक बड़ा निवेश रहा है। वहीं भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसंल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) आमतौर पर विलय एवं अधिग्रहण में ज्यादा आक्रामक नहीं रही है और इसने वित्त वर्ष 2026 में अनुमानित 77.3 करोड़ डॉलर खर्च किए। इसी तरह एचसीएलटेक ने वित्त वर्ष 2026 में 42 करोड़ डॉलर और विप्रो ने हर्मन डीटीएस यूनिट के अधिग्रहण पर 37.5 करोड़ डॉलर खर्च किए।