एलटीएम ने रोजगार एजेंसी रैंडस्टैंड के यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में टेक्नॉलजी और कंसल्टिंग सर्विसेज के व्यवसाय को लगभग 16 करोड़ यूरो में खरीदने का प्रस्ताव किया है। इस कदम से इस मझोले आकार वाली आईटी सेवा कंपनी को एरोस्पेस, डिफेंस, ऑटोमोटिव और वित्तीय सेवा के क्षेत्रों में विस्तार में मदद मिलेगी।
यह सौदा एलटीएम को यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के तेजी से बढ़ते कारोबारों में विस्तार करने में भी मदद करेगा। इससे डिजिटल इंजीनियरिंग, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के क्षेत्र में कंपनी की क्षमताएं और ज्यादा मजबूत होंगी।
एलटीएम के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक वेणु लांबू ने एक बयान में कहा, ‘प्रस्तावित समझौता, एक ज्यादा मजबूत, विविध और संतुलित पोर्टफोलियो बनाने की हमारी पांच-साल की रणनीति के अनुरूप है। हमारी वैश्विक एआई-केंद्रित क्षमताओं को स्थानीय संदर्भ और उद्योग की गहरी समझ के साथ यह अधिग्रहण उन बाजारों में नियमों के अनुरूप, डोमेन-आधारित एआई सेवाएं और सॉवरिन समाधान देने की हमारी क्षमता को मजबूत करेगा, जो हमारे लिए रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण हैं।’
अधिग्रहण वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है। इस सौदे से एलटीएम की वैश्विक एआई क्षमताएं स्थानीय डोमेन में बढ़ेंगी और आसपास के भौगोलिक क्षेत्रों में भी विशेषज्ञता बढ़ेगी। ग्राहकों को सॉवरिन, अनुकूल मॉडल में डिजिटल और एआई बदलाव प्रदान करने के लिए ये सेवाएं बेहद महत्त्वपूर्ण हैं। इसमें रैंडस्टैंड के भारत वैश्विक क्षमता केंद्र के लिए एआई-सक्षम परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए पांच-वर्षीय आईटी सेवा साझेदारी भी शामिल है।
जिन व्यवसायों का अधिग्रहण किया जा रहा है, उनका 2025 में कुल राजस्व 46.9 करोड़ यूरो था। उनके पास लगभग 2,900 बिल योग्य कर्मचारी हैं।
रैंडस्टैड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सैंडर वैन टी नूर्डेंडे ने कहा, ‘प्रस्तावित समझौता हमारी ‘पार्टनर फॉर टैलेंट’ रणनीति की दिशा में सोचा-समझा कदम है। एलटीएम के साथ साझेदारी करके हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे ग्राहकों को विश्व-स्तरीय सेवाएं लगातार मिलती रहें। साथ ही, हम अपने पोर्टफोलियो को भी सुव्यवस्थित करेंगे ताकि उन विकास-उन्मुख क्षेत्रों और डिजिटल मार्केटप्लेस में निवेश किया जा सके, जो सबसे अधिक विस्तार और मूल्य प्रदान करते हैं।’
वित्त वर्ष 2026 में एलटीएम के कुल राजस्व में यूरोप का योगदान 15 प्रतिशत रहा, जबकि उत्तर अमेरिका का 73 प्रतिशत और शेष योगदान उभरते बाजारों का रहा।