विप्रो ने करीब छह साल के अंतराल के बाद आज अपने पहले बड़े सौदों में से एक की घोषणा की, जिससे सुबह कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर 3.6 फीसदी तक उछल गया था। भारत की चौथी सबसे बड़ी आईटी सेवा फर्म ने सिंगापुर स्थित ओलाम ग्रुप के साथ 8 साल के लिए एक सौदे की घोषणा की। इससे कुल 1 अरब डॉलर से अधिक का अनुबंध मूल्य मिलेगा तथा 80 करोड़ डॉलर खर्च की प्रतिबद्धता का अनुमान है।
इस सौदे के तहत ओलाम ग्रुप की आईटी इकाई माइंडस्प्रिंट का 37.5 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण करना भी है। विप्रो के सीईओ श्रीनी पल्लिया के नेतृत्व में यह सौदा विप्रो के लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि उनके नेतृत्व में कंपनी लगातार वृद्धि के लिए काम कर रही है।
विश्लेषकों ने बताया कि पल्लिया की अुगआई में विप्रो धीरे-धीरे अपने लिए बड़ा सौदा हासिल करने की दिशा में काम कर रही है क्योंकि कंपनी पिछले दशक में अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी पिछड़ गई थी। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने कहा कि यह सौदा विप्रो का अब तक का सबसे बड़ा सौदा है और इससे कंपनी की आय बढ़ेगी।
आईटी कंपनियां अपने आय के मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप के बाजारों पर निर्भर हैं मगर एशिया में आईटी कंपनियों के लिए इस तरह का बड़ा सौदा दुर्लभ है। हालांकि कंपनियां अब अपने पारंपरिक राजस्व आधार में विविधता लाने की कोशिश कर रही है। इन्फोसिस ने पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में साइबर सुरक्षा और दूरसंचार क्षेत्र में कुछ सौदे हासिल किए थे।
विश्लेषकों ने बताया कि ऐसे सौदे हासिल करना विप्रो की एआई रणनीति को भी पुख्ता करता है। विप्रो ओलाम ग्रुप को परामर्श और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित एंड-टू-एंड सेवाएं प्रदान करेगी।
एक अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज रिसर्च फर्म के एक विश्लेषक ने कहा, ‘श्रीनी ने पिछले दो वर्षों में विप्रो के लिए कई बड़े सौदे हासिल किए हैं। वर्तमान माहौल में एक या दो बड़े सौदे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में स्थिति बदलने के लिए पर्याप्त हैं।’
पल्लिया के अन्य बड़े सौदों में हर्मन के डिजिटल बदलाव कारोबार का 37.5 अरब डॉलर में अधिग्रहण और ब्रिटिश बीमाकर्ता फिनिक्स ग्रुप के साथ 10 साल का 64.5 करोड़ डॉलर का सौदा शामिल है। कंपनी 3 करोड़ डॉलर के ऊपर के सौदों को कंपनी बड़ा सौदा बताती है।
विप्रो सीईओ के नेतृत्व में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान बड़े सौदे हासिल करने की दर 17.5 फीसदी बढ़कर 5.4 अरब डॉलर हो गई जबकि पिछले वित्त वर्ष के नौ महीनों में यह स्थिर मुद्रा में लगभग 6.4 अरब डॉलर थी।
इस सौदे का एक और महत्त्वपूर्ण पहलू माइंडस्प्रिंट का अधिग्रहण है। भारत में कारोबार करने वाली इस कंपनी के कुल 3,200 कर्मचारी हैं।
एचएफएस रिसर्च के सीईओ फिल फर्स्ट ने कहा, ‘जो बात माइंडस्प्रिंट को दिलचस्प बनाती है, वह न केवल इसकी इंजीनियरिंग और उत्पाद डीएनए है बल्कि ओलम ईकोसिस्टम में इसकी गहरी पैठ भी है। यह विप्रो को एशिया भर में कृषि, कमोडिटी, लॉजिस्टिक और ट्रेडिंग में के अत्यधिक जटिल वास्तविक दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला तक तत्काल पहुंच प्रदान करती है।
माइंडस्प्रिंट खाद्य और कृषि-व्यवसाय, विनिर्माण, खुदरा और उपभोक्ता डिब्ब बंद उत्पाद, साथ ही स्वास्थ्य सेवा और लाइफ साइंसेज सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और डिजिटल सेवाएं प्रदान करती है।