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टूटा चावल बनेगा एथनॉल का स्थायी कच्चा माल, सरकार ने E-20 के बाद E-27 लक्ष्य पर नजरें टिकाईं

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सरकार ने एथनॉल उत्पादन के लिए अधिशेष टूटे चावल की नीलामी का नियम बनाया, जिससे ई-20 के बाद ई-27 और ई-30 मिश्रण लक्ष्य पूरे होंगे।

Last Updated- August 11, 2025 | 10:44 PM IST
Ethanol
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ई-20 मिश्रण के लक्ष्य को वर्ष 2030 की निर्धारित समयसीमा से पांच वर्ष पहले वर्ष 2025 में हासिल करना ‘महत्त्वपूर्ण उपलब्धि’ है। लिहाजा सरकार की समिति ई 20 से भी आगे ई 27 या ई 30 का खाका तैयार कर रही है। यह जानकारी उपभोक्ता मामले मंत्रालय में खाद्य व सार्वजनिक आपूर्ति विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने ‘सायम’ के कार्यक्रम में दी।

सोशल मीडिया में ईंधन दक्षता व कारों के ईंजन में ई 20 ईंधन के प्रभाव पर जारी चर्चा के दौर में उनकी टिप्पणी आई है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने बीते शुक्रवार को कहा था कि ई 20 मिश्रण पेश किए जाने के बाद से कोई भी इंजन फेल होने की जानकारी नहीं मिली। हालांकि प्रदर्शन नाममात्र का 1 से 3 प्रतिशत गिरा।

चोपड़ा ने एथनॉल के कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए घोषणा की है।

इसके तहत अगले खरीफ विपणन सत्र से पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, ओडीशा और आंध्र प्रदेश की चावल मिलों को 10 प्रतिशत से अधिक टूटे हुए चावल की आपूर्ति करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि अभी मानक भारतीय खाद्य निगम की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की खरीद का 25 प्रतिशत है।

उन्होंने बताया, ‘अधिशेष 15 प्रतिशत टूटे हुए चावल की मिलों को एथनॉल मिश्रण के लिए सीधे नीलामी की जाएगी।’ उन्होंने कहा, ‘इससे ईंधन उद्योग को टूटे हुए चावल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो पाएगी। यह सफल रहता है तो इसे वर्ष 2026-27 में आगे बढ़ाया जा सकता है।’ इस बदलाव से भारतीय खाद्य निगम के भंडारण और अनाज को लाने ले जाने के बोझ में भी कमी आएगी। इसका कारण यह है कि अब टूटे चावल केंद्रीय पूल में प्रवेश नहीं करेगा।

दरअसल, जब चावल मिलें भारतीय खाद्य निगम के लिए धान से चावल निकालती हैं तो करीब 20-25 प्रतिशत टूटा अनाज प्राप्त होता है। नए खरीद मानदंडों के तहत भारतीय खाद्य निगम 10 प्रतिशत टूटा चावल स्वीकार करेगा। इससे मिल के पास करीब 15 प्रतिशत अधिशेष टूटा चावल मिल जाएगा। इस 15 प्रतिशत हिस्सेदारी को मिल मालिक एथनॉल संयंत्र को नीलाम कर सकेंगे।

चोपड़ा ने केवल मोलैसिस बल्कि गन्ने के रस व अनाज के विविधीकरण को अनुमति देने के लिए राष्ट्रीय बॉयोफ्यूल पॉलिसी 2018 को श्रेय दिया। इससे मिश्रण वर्ष 2013 के 1.5 प्रतिशत से बढ़कर बीते माह 20 प्रतिशत हो गया था।

उन्होंने कहा, ‘ई 20 के मिश्रण को हासिल कर लिया गया है। अब हम कहां आगे बढ़ेंगे? क्या हम ई 22 पर नजर रखेंगे? क्या हम ई 27 पर ध्यान केंद्रित करेंगे? क्या हम ई 30 को देखेंगे? अंतर मंत्रालयी समिति ने ई 20 से आगे का खाका तैयार करने के लिए कार्य किया है।’

उन्होंने कहा कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में संपन्नता लाया है और इसने सब्सिडी मुहैया कराने की आवश्यकता को खत्म कर दिया है। कभी सब्सिडी चीनी क्षेत्र को बचाए रखती थी।

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First Published - August 11, 2025 | 10:15 PM IST

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