अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने बुधवार को कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण खाड़ी देशों में तेल उत्पादन तेजी से गिरा है। इसकी वजह से इस साल की चौथी तिमाही तक वैश्विक तेल बाजार घाटे में रहेगा। आईईए ने अपनी मासिक तेल बाजार रिपोर्ट में कहा, ‘ अगर युद्ध खत्म करने पर सहमति बन जाती है और होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही की अनुमति मिल जाती है तो मांग गति पकड़ेगी, लेकिन आपूर्ति में धीरे धीरे सुधार की संभावना है।’
अप्रैल में तेल की वैश्विक आपर्ति 18 लाख बैरल रोजाना घटकर 951 लाख बैरल रोजाना रही और इस तरह से फरवरी से अब तक आपूर्ति 128 लाख बैरल कम रही है। होर्मुज स्ट्रेट से टैंकरों की आवाजाही अभी भी सीमित है, ऐसे में खाड़ी देशों के आपूर्तिकर्ताओं से कुल आपूर्ति 1 अरब बैरल कम हो गई है और आपूर्ति को अभूतपूर्व झटका लगा है। अगर यह माना जाए कि होर्मुज स्ट्रेट से जून से धीरे धीरे आवाजाही शुरू हो जाएगी, तो 2026 में तेल की वैश्विक आपूर्ति औसतन 39 लाख बैरल प्रतिदिन कम होगी और कुल आपूर्ति 1,022 लाख बैरल कम रहेगी।
मांग की स्थिति देखें तो रिफाइनरों ने उत्पादन कम कर दिया है और कच्चे तेल का आयात भी काफी घटा दिया है। केप्लर के मुताबिक फरवरी से अप्रैल के बीच चीन के समुद्री रास्ते से होने वाला कच्चे तेल का आयात 36 लाख बैरल रोजाना तक गिर गया। आईईए ने बताया कि जापान ने भी आयात में बड़ी कटौती की है, जो 19 लाख बैरल रोजाना रही। वहीं कोरिया में यह 10 लाख बैरल रोजाना और भारत में 7,60,000 बैरल रोजाना रही। अप्रैल में वैश्विक रिफाइनरी गतिविधियों में लगभग 50 लाख बैरल रोजाना (सालाना आधार पर) की गिरावट से कच्चे तेल के बाजार में तनाव कुछ समय के लिए कम जरूर हुआ है, लेकिन अब यह दबाव तेजी से तैयार उत्पादों के बाजार में भी फैल रहा है।