पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति रुकने के कारण केंद्र सरकार ने देसी तेल शोधन कंपनियों को खाना पकाने के काम आने वाली तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। भारत सरकार ने कहा कि देश के उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल भारत की घरेलू एलपीजी का 99 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति करते हैं। सरकार ने कहा है कि यह निर्देश अगले आदेश तक जारी रहेगा।
एक सरकारी आदेश में 5 मार्च को इन कंपनियों से कहा गया है कि रिफाइनरियों द्वारा उत्पादित अतिरिक्त एलपीजी तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों अर्थात् इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को दी जानी चाहिए। आदेश में कहा गया है कि इन सरकारी कंपनियों द्वारा खरीदी गई अतिरिक्त एलपीजी का उपयोग केवल घरेलू रसोई गैस के उपभोक्ताओं के लिए किया जा सकता है।
इस बीच, सभी तेल शोधन कंपनियों को पेट्रोकेमिकल उत्पादों या ऐसे अन्य डाउनस्ट्रीम डेरिवेटिव के निर्माण के लिए प्रोपेन या ब्यूटेन को मोड़ने, उपयोग करने या संसाधित नहीं करने का निर्देश दिया गया है। एलपीजी का उत्पादन प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग कर किया जाता है।
एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार को कहा, ‘हमारे पास पर्याप्त शोधन क्षमता है, जिसका उपयोग अधिक एलपीजी का उत्पादन करने के लिए किया जा सकता है। हमारी प्राथमिकता घरेलू स्तर पर एलपीजी की आपूर्ति करना है। हमारे पास अमेरिका से भी एलपीजी की आपूर्ति हो रही है।’
अधिकारी ने भारतीय रिफाइनरों द्वारा उत्पादन की जाने वाली अतिरिक्त एलपीजी की मात्रा पर जानकारी नहीं दी है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण भारत के लिए एलपीजी की उपलब्धता थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
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भारत अपनी घरेलू एलपीजी आवश्यकताओं के लिए लगभग 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर है और यहां कुल एलपीजी आयात का लगभग 85 से 90 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है। इसके शिपमेंट के लिए होर्मुज स्ट्रेट का ही उपयोग किया जाता है। एलपीजी आपूर्ति में विविधता लाने के उद्देश्य से भारत की सरकारी कंपनियों ने 2026 में ही अमेरिका से लगभग 22 लाख टन एलपीजी आयात के लिए एक साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, जो देश के वार्षिक एलपीजी आयात का लगभग 10 प्रतिशत है।
मैरिटाइम इंटेलिजेंस फर्म केप्लर में प्रमुख विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, ‘घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, लेकिन इनकी संरचना और परिचालन संबंधी सीमा का मतलब है कि उत्पादन इतना अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता कि आयात करने की जरूरत न पड़े। ज्यादा से ज्यादा इतना ही उत्पादन बढ़ाया जा सकता है कि एक से दो अतिरिक्त वीएलजीसी (बहुत विशाल गैस वाहक) कार्गो प्रति माह कम आयात करने पड़ें।’
रितोलिया ने कहा कि पश्चिम एशिया पर एलपीजी निर्भरता और सीमित अल्पकालिक आपूर्ति व्यवस्था को देखते हुए मौजूदा हालात में एलपीजी आपूर्ति बनाए रखना चिंता का सबब है। इस बीच, केंद्र सरकार ने कहा कि यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और पेट्रोलियम उत्पाद (उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति का रखरखाव) आदेश, 1999 के तहत जारी किया गया है, जो अगले निर्देश आने तक प्रभावी रहेगा।