अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने कहा है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान ने मध्यम अवधि में इस गैस की वैश्विक आपूर्ति वृद्धि के अनुमान को कम कर दिया है। यही नहीं, इसके कारण एलएनजी की लगातार बढ़ती मांग पर भी कम से कम दो साल तक के लिए प्रभावित कर दिया है।
आईईए ने कहा कि मार्च-अप्रैल की अवधि के दौरान कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से एलएनजी आपूर्ति में लगभग 20 अरब क्यूबिक मीटर का नुकसान होने की आशंका है। एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध प्रभावित एलएनजी संयंत्रों को दोबारा शुरू करने और संकट पूर्व क्षमता के स्तर पर लाने में कई सप्ताह का समय लग सकता है। इसके परिणामस्वरूप सामान्य संचालन की तुलना में उत्पादन लगभग 10 अरब क्यूबिक मीटर कम हो जाएगा।
मार्च में ईरान ने कतर के रास लाफान पर हमले शुरू किए थे, जो दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी हब है। ईरानी हमलों से इस संयंत्र के बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा है। हमलों के बाद कतर ने इस संयंत्र में एलउनजी का उत्पादन रोक दिया है।
आईईए ने कहा, ‘कतर की एलएनजी इकाइयों पर हमलों से हुए नुकसान के कारण 2030 तक देश के एलएनजी उत्पादन में लगभग 70 अरब क्यूबिक मीटर की कमी आ सकती है। ऐसा तब होगा जब इनकी मरम्मत चार साल में पूरी हो जाए। यदि मरम्मत में और अधिक समय लगा तो उत्पादन में और कमी आ सकती है। इसके अतिरिक्त, नॉर्थ फील्ड ईस्ट विस्तार परियोजना में देरी की वजह से 2026 से 2030 के बीच एलएनजी आपूर्ति में लगभग 20 अरब क्यूबिक मीटर की कमी आ सकती है।’
रिपोर्ट यह भी कहती है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण 2026 से 2030 की अवधि के लिए कुल एलएनजी आपूर्ति का लगभग 120 अरब क्यूबिक मीटर का नुकसान पहले ही हो चुका है। इसमें मौजूदा आपूर्ति व्यवधान भी शामिल है।
एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के परिणामस्वरूप होने वाला नुकसान 2026 से 30 की अवधि के लिए अपेक्षित वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का लगभग 15 प्रतिशत है। हालांकि एजेंसी यह भी कहती है कि आने वाले समय में नए संयंत्र शुरू होने से आपूर्ति में हुए नुकसान की भरपाई हो सकती है। हां, वृद्धि पर प्रभाव काफी हद तक 2026-27 की अवधि तक सीमित बताया जा रहा है।