पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ONGC के चेयरमैन और सीईओ अरुण कुमार सिंह ने कहा कि युद्ध से पैदा हुए दशकों के सबसे बड़े ऊर्जा संकट के बाद दुनिया जब उबरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति के पारंपरिक स्रोतों (खासकर मिडिल ईस्ट) पर निर्भरता को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग आधी जरूरत, गैस की 30 फीसदी और एलपीजी की 85-90 फीसदी जरूरत मध्य पूर्व से पूरी करता है। ऐसे में कीमत और आपूर्ति में दिक्कतों से बचने के लिए रणनीतिक भंडारण (स्टोरेज) बनाना जरूरी है।
छह हफ्ते तक चले युद्ध के दौरान वह प्रमुख समुद्री मार्ग बंद हो गया, जिसका उपयोग खाड़ी देश कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी के निर्यात के लिए करते थे। इससे भारत सहित कई आयातक देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो गया और गैस की सप्लाई को प्राथमिकता देनी पड़ी।
सिंह ने कहा, “यह सोचना कि मध्य पूर्व हमारे करीब है और वहां से संसाधन आसानी से मिल जाएंगे, अब सही नहीं है। बदलती वैश्विक स्थिति और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ऊर्जा सुरक्षा की पुरानी धारणाओं को कमजोर कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि एक बड़ा बदलाव आ चुका है। अगर दुनिया धीरे-धीरे डी-ग्लोबलाइजेशन की ओर बढ़ती है, तो समस्याएं और बढ़ेंगी। भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता इसे और ज्यादा जोखिम में डालती है। आने वाले 30-40 सालों में वैश्विक ताकतों के बीच वर्चस्व की लड़ाई जारी रह सकती है।
ओएनजीसी चेयरमैन ने जोर देकर कहा कि घरेलू उत्पादन बढ़ाना अब बेहद जरूरी है। हम इसे तेजी से बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर डीप वाटर को छोड़कर। उत्पादन बढ़ाना अब अस्तित्व का सवाल बन गया है।
उन्होंने भारत से अपील की कि देश के भीतर जहां भी तेल और गैस मिले, उसे हर कीमत पर खोजा और विकसित किया जाए। किसी संकट में कोई मदद नहीं करेगा। उन्होंने स्टोरेज क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया। हमें इस पर तुरंत काम करना होगा, चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े।
वैश्विक बाजार में बढ़ती अस्थिरता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रिफाइनिंग का गणित अब काफी अनिश्चित हो गया है। ऐसे हालात अब और ज्यादा देखने को मिलेंगे।
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उन्होंने यह भी कहा कि उत्पादक देश अब संसाधनों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। कोई देश नहीं चाहता कि आप उसका तेल ले जाएं, वह चाहता है कि आप उसका पैसा लें, तेल नहीं। उन्होंने ऊर्जा के स्रोतों और सप्लाई चेन में विविधता लाने की जरूरत पर जोर दिया।
एलपीजी के बारे में उन्होंने कहा कि भारत ने घरेलू आपूर्ति को काफी बढ़ाया है। पहले 30% था, अब 60% हो गया है। हालांकि इसके लिए रिफाइनरियों को बदलाव करना पड़ा, जिसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। उन्होंने सुझाव दिया कि सीएनजी के बजाय पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को प्राथमिकता दी जाए, ताकि घरों में गैस सप्लाई प्रभावित न हो। वैश्विक संकट के बावजूद सिंह ने कहा कि भारत ने स्थिति को अच्छी तरह संभाला है। देश ने जो किया है, उस पर आपको गर्व होना चाहिए।