केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि भारत सरकार के समुद्र मंथन कार्यक्रम के तहत घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अपतटीय डेटा जुटाने पर 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश की योजना है। पुरी ने कहा कि सरकार भारत के तलछटी बेसिनों में बड़ी खोज के लिए भूकंपीय डेटा अधिग्रहण में भारी निवेश की योजना बना रही है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘चूंकि ऊर्जा क्षेत्र की आगे की यात्रा के लिए डेटा बहुत महत्त्वपूर्ण है, इसलिए अब इस पर भारी निवेश पर जोर दिया जा रहा है।’
बिज़नेस स्टैंडर्ड ने खबर दी थी कि सरकार अज्ञात गहरे पानी और अल्ट्रा डीप वाटर तेल और गैस ब्लॉकों में भूकंपीय आंकड़ों के संग्रह के लिए धन आवंटित करने की योजना बना रही है, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट ने भारत की ऊर्जा आयात पर भारी निर्भरता को उजागर कर दिया है। यह कवायद खदान क्षेत्र नियामक हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय के नेतृत्व में होगी।
पुरी ने कहा कि सरकारी स्वामित्व वाली अपस्ट्रीम कंपनियों ने वित्तीय चुनौतियों के बावजूद पिछले 8 वर्षों में भूकंपीय आंकड़ों के अधिग्रहण पर 0.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है और 6,500 कुओं की ड्रिलिंग की गई है। उन्होंने कहा कि भारत के मौजूदा प्राकृतिक भंडारों से उत्पादन घट रहा है और देश की ऊर्जा की खोज को बढ़ावा देने और ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए ऐसे और अधिक भंडारों की खोज की आवश्यकता है। ऊर्जा की बढ़ती मांग और स्थिर घरेलू उत्पादन के कारण भारत की आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कच्चा तेल उत्पादन लगातार ग्यारहवें वर्ष गिरा, जबकि प्राकृतिक गैस उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष घटा। इसका मुख्य कारण तेल क्षेत्रों से प्राकृतिक गिरावट और नई प्रमुख खोजों की कमी है। वित्त वर्ष 2026 में, कच्चे तेल के लिए भारत की आयात पर निर्भरता 89 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस आयात पर निर्भरता 51 प्रतिशत रही।
पुरी ने कहा कि सरकार ने देश में तेल और गैस की खोज के आसपास के नियमों को अद्यतन किया है ताकि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भौगोलिक क्षेत्रों के साथ तालमेल बिठाया जा सके। इसकी वजह से निवेशकों की रुचि जगी है।